मध्य प्रदेश चुनाव: सट्टा बाजार हुआ सक्रिय,बीजेपी के लिए बुरी खबर


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (21 नवंबर): मध्य प्रदेश में इन दिनों चुनाव प्रचार जोरों पर है। एक तरफ जहाँ पिछले 15 सालों से सत्ता पर बीजेपी ने अपना किला बचाने के लिए पूरी जान झोंक दी है तो वहीँ कांग्रेस ने भी अपने  वनवास को खत्म करने के लिए पूरी जान लगा दी है। मगर चुनाव से ठीक पहले भोपाल का सट्टा बाजार सक्रिय हो गया है। सट्टा बाजार में 3 हफ्ते पहले तक भाजपा ही दोबारा सत्ता में लौट रही थी, लेकिन अब ऐसा लग रहा है जैसे भाजपा का विजय रथ कांग्रेस रोकने में कामयाब हो जाएगी। सट्टा बाजार में कांग्रेस के जीतने की उम्मीद जताई जा रही है। यूं तो सट्टा बाजार के ट्रेंड बदलते रहते हैं, लेकिन कल तक जो भाजपा की जीत की बात कर रहे थे, आज उनका कांग्रेस को जीतता हुआ बताना मोदी-शिवराज की नींद उड़ा देने के लिए काफी है।  



सट्टा बाजार में लग रहे हैं ये दाव
कुछ दिन पहले तक सट्टा बाजार में इस बात को लेकर दाव लगाए जा रहे थे कि कौन जीतेगा। अगर कोई शख्स भाजपा की जीत पर 10,000 रुपए का सट्टा लगा रहा था जो उसे 11,000 रुपए मिलने थे, जबकि अगर कोई शख्स कांग्रेस की जीत पर 4,400 रुपए का सट्टा लगा रहा था तो उसे 10,000 रुपए मिलने थे।  लेकिन अब ट्रेंड बदल गया है. अब सट्टा हार-जीत पर नहीं, बल्कि सीटों के हिसाब से लगाया जा रहा है। बुकीज का मानना है कि इस बार किसी भी पार्टी को बहुमत मिलना मुश्किल है, कांटे की टक्कर होगी।


कांग्रेस को ज्यादा सीटें
भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखते हुए सट्टा इस बात पर लगाया जा रहा है कि भाजपा को 102 से अधिक सीटें मिलेंगी या फिर कांग्रेस को 116 से अधिक सीटें मिलेंगी।  इन दोनों ही दाव पर पैसा डबल हो रहा है, यानी अगर कांग्रेस को 116 से अधिक सीटें मिलीं और किसी ने इस पर दाव लगाया था तो उसके पैसे दोगुने हो जाएंगे, भले ही उसने कितने भी पैसे लगाए हों. इसी तरह अगर भाजपा को 102 से अधिक सीटें मिल गईं तो उस पर दाव लगाने वालों का पैसा दोगुना हो जाएगा।



सट्टा बाजार में कितना दम?
क्या वाकई जिस ओर सट्टा बाजार झुकता है, उसी पार्टी की जीत होती है? आइए एक नजर डालते हैं पुराने आंकड़ों पर और जानते हैं सट्टा बाजार के अनुमान सही साबित हुए या गलत-
अगर सट्टा बाजार के पुराने आंकड़ों को देखा जाए तो यूपी चुनाव में भी सट्टा बाजार का अनुमान सही साबित हुआ था. सट्टा बाजार में उस वक्त भाजपा पर पैसे लगाए गए थे और भाजपा जीती भी। वहीं बिहार चुनाव में सटोरियों को मुंह की खानी पड़ी. सट्टा लगाया था भाजपा पर, लेकिन जीत गए नीतीश कुमार, जो उस वक्त महागठबंधन का नेतृत्व कर रहे थे। इतना ही नहीं, पंजाब में भी सटोरियों का अनुमान था कि आम आदमी पार्टी जीतेगी और कांग्रेस दूसरे नंबर रहेगी. इसके उलट कांग्रेस ने पंजाब में जीत हासिल की। उत्तराखंड चुनाव में सट्टा बाजार ने यह अनुमान लगाया था कि भाजपा जीतेगी और वहां पर भाजपा की सरकार बनी, यानी उत्तराखंड में सट्टा बाजार का अनुमान सही बैठा।




अगर अभी तक के आंकड़ों को देखा जाए तो यह साफ हो जाता है कि सट्टा बाजार द्वारा किया गया आकलन सटीक नहीं होता है।  सट्टा बाजार का आकलन भी एग्जिट पोल की तरह है, जो कभी सही हो जाता है तो कभी बाजी उल्टी पड़ जाती है. पहले कहा जाता था कि सट्टा बाजार के अनुमान एग्जिट पोल से भी अधिक विश्वसनीय होते हैं, क्योंकि उसमें लोग जमीनी स्तर पर रिसर्च कर के दाव खेलते हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों के आंकड़ों ने ये भ्रम भी दूर कर दिया है।  अब इस बार मध्य प्रदेश चुनाव में ये देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का वनवास खत्म होगा या फिर भाजपा का विजयी रथ एक और जंग जीत जाएगा।

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राजस्थान और छत्तीसगढ़ में क्या है हाल
मध्य प्रदेश के अलावा सट्टा बाजार में राजस्थान और छत्तीसगढ़ को लेकर भी हलचल है। सट्टा बाजार में तो राजस्थान में कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणी तक हो गई है। हालांकि छत्तीसगढ़ में मुकाबला रोचक बताया जा रहा है इसलिए सटोरिये सेफ खेल रहे हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ को लेकर सट्टा बाजार कोई भविष्यवाणी नहीं कर रहा है। वैसे आपको बता दें की भारत में सट्टा बाजार पूरी तरह से गैरकानूनी है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की तमाम सक्रियता के बावजूद क्रिकेट मैचों और चुनावों में यह पूरी तरह से सक्रिय हो जाता है। बताया जाता है कि चुनावों के दौरान राजनीतिक पार्टियों की जीत-हार पर बाजार में करोड़ों रुपये दांव पर लगाए जाते हैं।