मुआवजे पर सरकार से निराश भोपाल गैस कांड के पीड़‍ितों ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (8 मई): मुआवजे के लिए भोपाल गैस कांड के पीड़ितों ने एकबार फिर आवाज बुलंद की है। 1984 के खौफनाक भोपाल गैस कांड के पीड़‍ितों के एसोसिएशन ने राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर जल्‍द मुआवजे के साथ-साथ वारेन एंडरसन के देश छोड़कर जाने में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और मध्‍य प्रदेश के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री अर्जुन सिंह की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। यह पत्र ऐसे समय में आया है, जबकि पीएम मोदी हाल में कई बार इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस को घेर चुके हैं। इससे पहले हादसा पीड़ितों के संगठनों के नेताओं ने मार्च में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र और प्रदेश की सरकार से अतिरिक्त मुआवजे के लिए लगाई गई सुधार याचिका में सुधार करने की अपील की थी।आपको बता दें की मध्य प्रदेश बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं ने भोपाल के हर गैस पीड़ित को मुआवजे में 5 लाख रूपये दिलवाने का वादा किया है लेकिन केंद्र और प्रदेश की सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत मौतों और बीमारियों के आंकड़े सुधारने पर ही यह वादा पूरा किया जा सकता है। भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने के मुताबकि इस साल जनवरी में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को भेजी चिट्ठी का अभी तक जवाब नहीं आया। साथ ही उन्होंने कहा कि 'हमने अपनी चिट्ठी में उन दस्तावेजी सबूतों का जिक्र किया था, जो यह दिखाते हैं कि दिसंबर 1984 में मिथाइल आइसो सायनेट गैस की वजह से पीड़ितों को पहुंचे नुकसान की सही जानकारी प्रदेश सरकार जानबूझकर छिपा रही है और सर्वोच्च न्यायालय को गुमराह कर रही है। हमने उनसे गुजारिश कर कहा कि वे सरकारी दस्तावेजों और अस्पतालों के रिकार्ड से गैस कांड की वजह से हुई मौतों और बीमारियों के सही आंकड़े जुटाएं। लेकिन आज तक चिट्ठी का जवाब नहीं आया।'आपको बता दें कि भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक है। यहां 3 दिसंबर, 1984 को एक भयानक औद्योगिक दुर्घटना हुई थी, जिसमें करीब 4,000 लोगों की जान चली गई, जबकि हजारों की तादाद में लोग शरीरिक विकलांगता का शिकार हुए। यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक बनाने वाले इस संयंत्र से करीब 30 टन जहरीली मिथाइल आइसोसायनेट गैस का रिसाव हुआ था, जिससे हजारों मजदूर और वहां आसपास में रहने वाले लोग प्रभावित हुए थे।