बड़ी खबर: कमलनाथ होंगे मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री



न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (13 दिसंबर): मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के परिणामों की घोषणा हो गई है। कांटे की टक्कर के बीच कांग्रेस ने बाजी मारी। वह प्रदेश में सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई। कांग्रेस ने 114 तो भाजपा ने 109 सीट पर कब्जा किया। इस तरह कांग्रेस बहुमत से सिर्फ दो सीट दूर है। इस बीच बसपा और सपा ने कांग्रेस के समर्थन की घोषणा कर दी है। इस विधानसभा चुनाव की 230 सीटों पर कुल 2899 उम्मीदवार थे।  


इसी के साथ मध्य प्रदेश में कांग्रेस का 15 वर्षों से जारी वनवास खत्म हो गया है और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के चुनाव की दूसरी चुनौती भी सुलझा ली है। दिग्गज और अनुभवी नेता कमलनाथ को राज्य की कमान मिली है। कमलनाथ मध्य प्रदेश के नए सीएम होंगे। मध्य प्रदेश में सीएम कुर्सी के दावेदारों में युवा ज्योतिरादित्य सिंधिया भी थे। दोनों नेताओं ने ही मध्य प्रदेश में कांग्रेस की वापसी में अहम भूमिका निभाई है।




शिवराज सिंह चौहान के विपरीत कमलनाथ को एक समृद्ध राजनेता के तौर पर देखा जाता है। कमलनाथ का जन्म कानपुर में हुआ और वह कोलकाता में पले-बढ़े हैं। उनकी पढ़ाई दून स्कूल से हुई है। वह कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से स्नातक हैं। कमलनाथ पहली बार 1980 में लोकसभा सांसद चुने गए थे। उसके बाद 1985, 1989, 1991 तक लगातार लोकसभा चुनाव जीतते रहे।



1995 से 1996 के बीच वह केंद्रीय मंत्री रहे। इसके बाद 1998 में 12वीं लोकसभा और 1999 में तीसरी लोकसभा के लिए चुने गए। 2001 से 2004 तक वह कांग्रेस के जनरल सेक्रटरी रहे। 2004 के लोकसभा चुनाव में वह दोबारा चुने गए और 2004 से 2009 तक कैबिनेट मिनिस्टर रहे। 2009 में एक बार से वह लोकसभा पहुंचे और कैबिनेट में शामिल हुए। 2012 में उन्होंने शहरी विकास मंत्रालय का कार्यभार भी संभाला। 




छिंदवाड़ा लोकसभा से 9 बार सांसद रह चुके कमलनाथ ने राज्य में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाई है। वह पिछले कई दशकों से राज्य में जमीन स्तर पर काम कर रहे हैं और यहां उनका मजबूत जनाधार भी है।

कमलनाथ गांधी परिवार की तीन पीढ़ियों के करीब रहे हैं। छिंदवाड़ा के लोगों के सामने कमलनाथ का परिचय कराते हुए इंदिरा गांधी ने कहा था- 'ये मेरे तीसरे बेटे हैं, इन्हें वोट दीजिएगा।' बाद में 'इंदिरा के दो हाथ, संजय गांधी और कमलनाथ' का नारा भी खूब गूंजा। कमलनाथ ना केवल संजय गांधी के करीबी दोस्त रहे बल्कि राजीव गांधी के भी भरोसेमंद सिपाही रहे। पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच कमलनाथ की स्वीकार्यता और अपनी चुनावी रणनीति में कुशलता की वजह से यूपीए-2 सरकार में सोनिया गांधी के भी विश्वासपात्र बन गए।