बिहार से सामने आया एम-फिल घोटाला, ठगे 9 करोड़ रुपये

पटना (28 जनवरी): बिहार से एक बार फिर ऐसी खबर सामने आई है, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बार मामला उच्चतम शिक्षा और डिग्री के खेल से जुड़ा है, जहां एक साथ एक-दो नहीं बल्कि 3000 लोगों को शोधार्थी बनाने के सपने दिखा कर अंधेरे में रखा गया।

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बिहार विश्वविद्यालय में हुए इस घोटाले का किंगपिन भी रसूखदार है। इस शिक्षा माफिया नें राजभवन और यूजीसी की अनुमति लिए बगैर और नियमों को दरकिनार करते हुए डिस्टेंस मोड से न सिर्फ एम-फिल की पढ़ाई शुरू करा दी, बल्कि तीन हजार शोधकर्ताओं का नामांकन लेकर करीब नौ करोड़ रुपये की अवैध उगाही भी कर ली।

ठगे गए शोधार्थियों की शिकायत पर राजभवन ने शिक्षा माफिया को निलंबित करके विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया है। इस घोटाले का कथित किंगपिन मुजफ्फरपुर स्थित बिहार विश्वविद्यालय के दुरस्थ शिक्षा निदेशालय का पदाधिकारी है, जिसका नाम ललन सिंह है। ललन पहले लंगट सिंह कॉलेज के बीसीए विभाग में था और उस पर वहां भी कार्रवाई की गई थी, लेकिन विभागीय सांठगांठ और कुलपति की कृपा पाकर वो फिर से दूरस्थ शिक्षा विभाग में नियुक्त हो गया।

सस्पेंड होने के बाद भी फिलहाल ललन को बचाने में विश्वविद्यालय के कई पदाधिकारी जुटे हुए हैं। ललन ने राजभवन और यूजीसी को अंधेरे में रखकर डिस्टेंस मोड में विश्वविद्यालय में एम-फिल कोर्स की शुरुआत कर ली जबकि नियमों के मुताबिक रिसर्च वर्क रेगुलर कोर्स में होते हैं। बीते दो सत्रों में ललन ने छात्र-छात्राओं को अंधेरे में रख कर तीन हजार शोधार्थियों का नामांकन लेकर उनसे करीब नौ करोड़ रुपये भी उगाह लिए।