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अयोध्या सरगर्मी: योगी सरकार ने रद्द की सभी अफसरों की छुट्टियां

रामजन्मभूमि केस की सुनवाई 40 दिन लगातार चलने के बाद पूरी हो गई। सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 17 नवंंबर से पहले अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना देगा।

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(16 अक्टूबर): रामजन्मभूमि केस की सुनवाई 40 दिन लगातार चलने के बाद पूरी हो गई। सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 17 नवंंबर से पहले अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना देगा। इधर, संभावित फैसले से पहले यूपी में हलचल तेज हो गई है। अयोध्या में जहां 10 दिसंबर तक धारा 144 लागू है वहीं, राज्य सरकार ने सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की छुट्टियां 30 नवंबर तक रद्द कर दी है। सरकार ने अपने आदेश में सभी अफसरों को अपने-अपने मुख्यालय में बने रहने का निर्देश दिया है।राज्य सरकार के जारी आदेश में छुट्टी रद्द करने का कारण त्योहार बताया गया है लेकिन माना जा रहा है कि अगले महीने अयोध्या पर संभावित फैसले से पहले सरकार ने यह कदम उठाया है।

बता दें कि अयोध्या केस में आज आखिरी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में जबरदस्त गहमागहमी और ड्रामा देखने को मिली। 5 जजों की संविधान पीठ के सामने मुस्लिम पक्षकार के वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने अयोध्या से संबंधित एक नक्शा ही फाड़ दिया। दरअसल, हिंदू पक्षकार के वकील विकास सिंह ने एक किताब का जिक्र करते हुए नक्शा दिखाया था। नक्शा फाड़ने के बाद हिंदू महासभा के वकील और धवन में तीखी बहस हो गई। इससे नाराज चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा था जज उठकर चले जाएंगे।

जानें कोर्ट में हुआ क्या

हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने कहा, 'हम अयोध्या रीविजिट किताब कोर्ट के सामने रखना चाहते हैं जिसे रिटायर्ड आईपीएस ऑफिसर किशोर कुणाल ने लिखी है। इसमें राम मंदिर के पहले के अस्तित्व के बारे में लिखा है। किताब में हंस बेकर का कोट है। चैप्टर 24 में लिखा है कि जन्मस्थान के वायु कोण में रसोई थी। जन्मस्थान के दक्षिणी भाग में कुआं था। बैकर के किताब के हिसाब से जन्मस्थान ठीक बीच में था। विकास ने उसी किताब का नक्शा कोर्ट को दिखाया। जिसे धवन ने पांच टुकड़ों में फाड़ डाला।

भारत के संविधान पर यकीन'

अयोध्या मामले में राम जन्मभूमि न्यास से जुड़े राम विलास वेदांती ने कहा, 'हम किसी कीमत पर रामलला की भूमि को छोड़ना नहीं चाहते हैं। रामलला की विजय हो चुकी है, सिर्फ फैसला आना बाकी है। हमें सुप्रीम कोर्ट पर यकीन है, जजों पर भरोसा है, भारत के संविधान पर विश्वास है। इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर और कृष्ण जन्मभूमि को देखा जाएगा। मैं अयोध्या की धरती पर किसी मस्जिद का निर्माण नहीं होने दूंगा। मस्जिद बनाना है तो बाहर किसी भी कोने में बनाएं लेकिन अयोध्या की धरती पर मैं किसी मस्जिद का निर्माण नहीं होने दूंगा।'

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