आतंकी हमलों से ज्यादा खूंखार है इश्क-मुहब्बत, देखें 15 साल में मारे गये कितने हजार !

नई दिल्ली (2 अप्रैल): जिगर मुरादाबादी का एक शेर है, ये इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजे, एक आग का दरिया है और डूब के जाना है। जिगर मुरादाबादी ने जब यह शेर लिखा होगा तो उन्हें नहीं मालूम होगा कि इश्क की वज़ह से होने वाली मौतें आतंकी वारदातों में होने वाली मौतों से भी ज्यादा होगीं। बहरहाल, पिछले 15 सालों में आतंक से ज्यादा जानें भारत में इश्क के चलते गई हैं। 2001 से 2015 के दौरान इश्क-मुहब्बत के चलते 38,585 लोगों ने हत्या और गैर-इरादतन हत्या जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम दिया। यही नहीं इश्क में हारने और इससे जुड़ी अन्य वजहों से करीब 79,189 लोगों ने खुदकुशी करली। इसी अवधि में 2.6 लाख अपहरण के केस भी ऐसे दर्ज किए गए, जिनमें महिला के अपहरण की मुख्य वजह एकतरफा इश्क और महिला से शादी रचाने का इरादा था।


सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रतिदिन 7 हत्याएं, 14 आत्महत्याएं और 47 अपहरण के केस इश्क-मुहब्बत की वज़ह से होते हैं। दूसरी तरफ  15 सालों में आतंकी घटनाओं में 20,000 लोगों की मौत हो गई। इनमें सुरक्षा बल और आम नागरिक दोनों शामिल हैं। डेटा के मुताबिक आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश इश्क-मुहब्बत के मकसद से की गई हत्याओं के मामलों में आगे हैं। इन सभी राज्यों में इस अवधि में 3,000 से ज्यादा हत्याएं प्रेम प्रसंगों के चलते हुईं।