सिर्फ जलाभिषेक से प्रसन्न हो जाते हैं महा औघड़-दानी शिव

नई दिल्ली (22 फरवरी): भगवान शिव, देवों के देव हैं, भोले भंडारी हैं, जो सब के भंडार भरते हैं। शिवलिंग पर मात्र जल चढ़ाने से ही औघड़दानी प्रसन्न हो जाते हैं। महाशिवरात्रि पर उनके पूजन से विशेष फल की प्राप्ति होती है क्योंकि शिवरात्रि वह रात्रि है, जिसका शिवतत्त्व से घनिष्ठ संबंध है। भगवान शिव की अति प्रिय रात्रि को शिवरात्रि कहा जाता है।फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि शिव को यदि सच्चे मन से याद कर लिया जाए तो वह प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी पूजा में भी ज्यादा आडंबर की जरूरत नहीं होती। ये केवल जलाभिषेक, बिल्वपत्रों को चढ़ाने और रात्रि भर इनका जागरण करने मात्र से प्रसन्न हो जाते हैं। इस बार दो दिन पड़ने वाले महाशिवरात्रि का पर्व स्वार्थ सिद्ध एवं सिद्ध योग पड़ने से खास होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 24 फरवरी की रात्रि साढ़े नौ बजे प्रारंभ होगी, जो 25 फरवरी को रात्रि सवा नौ बजे तक रहेगी। महाशिवरात्रि का पर्व रात्रि व्यापिनी होने पर विशेष माना जाता है। ऐसे में 25 फरवरी की रात्रि में चतुर्दशी तिथि न होने से 24 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व शास्त्र सम्मत रहेगा।