लंदन हमला: क्यों ब्रिटेन को बनाया जा रहा है बार-बार निशाना

नई दिल्ली (15 सितंबर): लंदन की भूमिगत ट्रेन में एक धमाका हुआ, जिसके बाद 18 लोग जख्मी हो गए। हालांकि धमाका ज्यादा बड़ा नहीं था, लेकिन इससे एक बार फिर यह सवाल खड़े हो गए कि आखिरकार आतंकी बार-बार ब्रिटेन को क्यों निशाना बना रहे हैं।

इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण इस्लाम के नाम पर बड़ी तादाद में यूरोप से युवाओं का आईएस में शामिल होना भी है। ब्रिटेन में ज्यादातर हुए आतंकी हमलों में मुस्लिम युवक शामिल थे। ये तमाम लोग भटके हुए नौजवान, जिन्हें अपने गुस्से और मायूसी के लिए एक मकसद चाहिए था। जिन्होंने जिहादी इस्लाम का हवाला देकर लोगों का मजहब के नाम पर कत्ल किया।

ब्रिटेन में दो राजनीतिक घटनाएं महत्वपूर्ण हैं, जो दोनों साल 2016 में हुईं। लंदन के मेयर का चुनाव और यूरोप से निकलने के सवाल पर ब्रिटेन में जनमत संग्रह।

मेयर के चुनाव...

- लंदन के मेयर के चुनाव में मुस्लिम उम्मीदवार (लेबर पार्टी) के खिलाफ जिस तरह से ब्रिटिश प्रधानमंत्री तक ने 'इस्लामोफोबिया' का इस्तेमाल किया है, उसकी शायद ही कोई और मिसाल मिलती हो। - चुनाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने सदन में सादिक खान का चरमपंथी तत्वों से संबंध जोड़ा और कहा कि लेबर पार्टी के उम्मीदवार चरमपंथियों के साथ एक ही मंच पर बैठ चुके हैं और मुझे उनके बारे में बहुत चिंता है। - ये शब्द किसी अति दक्षिणपंथी या अतिवादी आंदोलन के नेता नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री के थे और उन्हीं की पार्टी के उम्मीदवार जैक गोल्डस्मिथ ने इसी इस्लामोफ़ोबिया को अपनी चुनावी मुहिम का केंद्रबिंदु बनाया।

ब्रेग्जिट पर जनमत संग्रह - मुख्यधारा की राजनीति में मुस्लिम विरोधी भावनाएं आप्रवासी विरोधी भावनाओं के साथ घुलमिल गई और बाहर वालों 'या आप्रवासी लोगों को कोसने या उन्हें बुरा-भुरा कहना एक तरह से स्वीकार्य हो गया। - जनमत संग्रह के बाद 'बाहर वालों के खिलाफ भावनाएं कातिलाना हद तक उभरीं। यूरोपीय आप्रवासियों को निशाना बनाया गया। मुसलमानों और प्रवासियों के साथ 'हेट क्राइम्स' में इजाफा हुआ।

मुसलमानों पर निशाना... - कई साल के बाद फिर 'पाकी' को बतौर उपहास इस्तेमाल किया गया और हिजाब पहनने वाली महिलाओं को भी विभिन्न घटनाओं में निशाना बनाया गया। - 11 सितंबर के बाद की अवधि में यह सोच तो बढ़ रही थी कि मुसलमान पश्चिमी समाज के लिए एक समस्या है और उनकी सोच और धर्म का पश्चिमी समाज के मूल्यों से तालमेल नहीं है।