लोकसभा चुनाव 2019: तीसरे चरण के चुनाव में इन बड़े चेहरों पर टिकीं सबकी निगाहें

न्यूज 24 ब्यूरो,नई दिल्ली (21 अप्रैल): लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में यूपी की 10 लोकसभा सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। इस चरण में समाजवादी पार्टी के साथ-साथ मुलायम सिंह यादव और उनके कुनबे को सियासी इम्तिहान से गुजरना है। सूबे की जिन 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव होने हैं, वहां गठबंधन के तहत 9 सीटों पर सपा मैदान में है और महज एक सीट पर बसपा चुनाव लड़ रही है। इस चरण में पूरी तरह से अखिलेश यादव बनाम नरेंद्र मोदी के बीच राजनीतिक लड़ाई लड़ी जा रही है। इन 10 सीटों में से चार सीटों पर उत्तर प्रदेश के बड़े नेता चुनाव मैदान में उतरेंगे।

रामपुर संसदीय सीट से सपा के आजम खान पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरे हैं। आजम को टक्कर देने के लिए इस सीट से दो बार की सांसद रहीं फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं और कांग्रेस से पूर्व विधायक संजय कपूर सियासी संग्राम में हैं।1967 के बाद रामपुर में पहली बार है जब कांग्रेस ने रामपुर के 'नवाब परिवार' से बाहर के किसी शख्स को प्रत्याशी बनाया है। सूबे में सबसे ज्यादा 51 फीसदी मुस्लिम मतदाता रामपुर सीट पर है। बावजूद इसके बीजेपी 2014 के नेपाल सिंह जीतने में कामयाब रहे थे। हालांकि इस बार पार्टी ने उनका टिकट काटकर जया प्रदा पर दांव लगाया है। जया प्रदा और आजम खान के बीच सीधा मुकाबला होता नजर आ रहा है।

फिरोजाबाद लोकसभा सीट की सियासी लड़ाई चाचा बनाम भतीजे के बीच बीच लड़ी जा रही है। इस सीट पर सपा से रामगोपाल यादव के बेटे और मौजूदा सांसद अक्षय यादव का मुकाबला प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल यादव से है। बीजेपी से डॉक्टर चंद्रसेन जादौन सहित 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। कांग्रेस ने इस सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा है। मोदी लहर में भी बीजेपी इस सीट पर 2014 में जीत नहीं सकी थी। फिरोजाबाद सीट पर जाट, मुस्लिम, दलित और यादवों वोटरों का वर्चस्व है, लेकिन सपा, बसपा गठबंधन और शिवपाल यादव के सियासी संग्राम में उतरने से मुकाबला दिलचस्प बन गया है। हालांकि चाचा-भतीजे के बीच लड़ाई में बीजेपी कमल खिलाने की जुगत में है।

मैनपुरी लोकसभा सीट को सपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव एक बार फिर मैनपुरी सीट से उतरे हैं। मुलायम के खिलाफ बीजेपी के प्रेम सिंह शाक्य सहित कुल 12 उम्मीदवार मैदान में हैं। सपा के समर्थन में कांग्रेस ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। पिछले आठ लोकसभा चुनाव से सपा लगातार जीत दर्ज कर रही है। बीजेपी का इस सीट पर अभी तक खाता नहीं खुला है। मोदी लहर में भी मुलायम का दुर्ग सुरक्षित रहा। 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव मैनपुरी और आजमगढ़ दोनों सीट से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने मैनपुरी सीट छोड़ दी, उन्होंने आजमगढ़ को अपना संसदीय क्षेत्र चुना। बाद में हुए उपचुनाव में उनके पोते तेजप्रताप सिंह यादव बड़े अंतर से जीत हासिल कर संसद पहुंचे। मुलायम सिंह एक बार फिर मैनपुरी से उतरे हैं और बसपा-आरएलडी-कांग्रेस का उन्हें समर्थन है। ऐसे में बीजेपी के लिए मुलायम के किले को भेदना आसान नहीं है।

पीलीभीत लोकसभा सीट बीजेपी के 'गांधी' की परंपरागत सीट मानी जाती है। इस सीट पर पिछले तीन दशक से इंदिरा गांधी के दूसरे बेटे संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी और बेटे वरुण गांधी का ही राज रहा है। बीजेपी ने पीलीभीत सीट से वरुण गांधी को एक बार फिर उतारा है। सपा ने इस सीट पर हेमराज वर्मा को उतारा है। कांग्रेस ने इस सीट को कृष्णा पटेल की अपना दल को दे रखा है। पीलीभीत सीट पर बीजेपी बनाम सपा की सीधी लड़ाई होती नजर आ रही है।

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