बीजेपी के शत्रुघ्न थाम सकते हैं कांग्रेस का हाथ, पटना साहिब से ही लड़ेंगे चुनाव

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (20 मार्च): बीजेपी के बागी शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस की टिकट पर बिहार के पटना साहिब सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। इससे पहले खबरें आ रही थी कि शत्रुघ्न सिन्हा लालू यादव की पार्टी आरजेडी में शामलि हो सकते हैं। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्र सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना करने से नाराज पार्टी ने उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया है और पार्टी ने वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को पटना साहिब सीट से अपना उम्मीदवार बनाने का मन बनाया है और इसका आज अधिकारिक ऐलान भी हो सकता है। जानकारी के मुताबिक महागठबंधन के टूटे हुए तार को जोड़ने में पटना साहिब क्षेत्र से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने बड़ी भूमिका निभाई। सूत्रों के मुताबिक पटना साहिब सीट से 'बिहारी बाबू' चुनाव' लड़ेंगे। हाल ही में उन्होंने पार्टी छोड़ने के संकेत दिए थे। उन्होंने ट्वीट कर लिखा था कि, 'मोहब्बत करने वाले कम न होंगे, (शायद) तेरी महफिल में लेकिन हम न होंगे।'  

पटना साहिब लोकसभा सीट से शत्रुघ्न सिन्हा लगातार दो बार चुनाव जीत चुके हैं और यहां के मौजूदा सांसद भी हैं। जातीय समीकरण के आधार पर पटना साहिब को कायस्थों के दबदबे वाली सीट माना जाता है। यहां कायस्थों के बाद यादव और राजपूत वोटरों का बोलबाला है। पिछले दो चुनावों से यहां कांग्रेस के उम्मीदवार नंबर दो रहे हैं। सियासी जानकारों के मुताबिक यहां के कायस्थ मतदाताओं का झुकाव बीजेपी की पक्ष में रहता है, ऐसे में शत्रुघ्न के कांग्रेस से उतरने पर यहां मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। कांग्रेस से चुनाव मैदान में आने के बाद शत्रुघ्न को गठबंधन के तहत यादव मतदाताओं का भी समर्थन मिल सकता है। जबकि, इसके ठीक उलट अगर ये सीट आरजेडी के खाते में गई और शत्रुघ्न सिन्हा लालटेन थामते हैं, तो उनके लिए कायस्थ वोटरों को अपने पक्ष में लाना आसान नहीं होगा। इसलिए इसबार भी इस बात की संभावना ज्यादा है कि महागठबंधन की ये सीट कांग्रेस के खाते में ही जाए और शत्रुघ्न सिन्हा यहां से कांग्रेस की टिकट पर चुनावी मैदान में उतरें। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय उनको पार्टी में लाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। अगर कांग्रेस यहां से उन्हें चुनावी मैदान में उतारती है तो उनकी जीत का रास्ता लालू-राबड़ी के सियासी दरबार से होकर ही सुनिश्चत होगा। भले ही वो कांग्रेस की टिकट पर ही चुनाव क्यों न लड़ें।कायस्थ, वैश्य, यादव और राजपूत बहुलता वाले इस सीट पर बीजेपी की ओर से केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद सबसे मुफिद उम्मीदवार साबित हो सकते हैं। उनके पिता ठाकुर प्रसाद अपने समय में उस इलाके के जाने-माने और बड़े कद्दावर नेता थे। साथ ही वो पटना पश्चिम से विधायक भी चुने जाते थे। ऐसे में रविशंकर प्रसाद के लिए पटना साहिब से पुराना नाता है और उनके लिए ये पुराना और काफी चिरपरिचित सीट है। हालांकि, रविशंकर प्रसाद की दावेदारी में सबसे बड़ी बाधा उनकी राज्यसभा सदस्यता है। अभी तकरीबन पांच साल का उनका कार्यकाल बाकी है।

पटना साहिब लोकसभा सीट शुरू से कांग्रेस, सीपीआई और बीजेपी का गढ़ रहा है। सारंगधर सिन्हा यहां के पहले सांसद थे। रामदुलारी सिन्हा ने 1962 में कांग्रेस की ओर से यहां का प्रतिनिधित्व किया था। वहीं सीपीआई की टिकट पर रामवतार शास्त्री यहां से तीन बार सांसद चुने गए। 1977 में इंदिरा विरोधी लहर में लोकदल के महामाया प्रसाद सिन्हा लोकसभा में पहुंचे। सीपी ठाकुर एक बार कांग्रेस और दो बार बीजेपी से लोकसभा पहुंच चुके हैं। वहीं 1989 में बीजेपी से शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव भी यहां से चुनाव जीत चुके हैं। रामकृपाल यादव भी यहां से तीन बार आरजेडी के टिकट पर सांसद चुने जा चुके हैं। परिसीमन के बाद से शत्रुघ्न सिन्हा का इस सीट पर कब्जा है। अब देखना दिलचस्प होगा में पटना साहिब की जनता इसबार किसे मौका देती है।