'सामना' के जरिए शिवसेना का ममता पर वार, तनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस को ठहराया जिम्मेदार

इंद्रजीत सिंह, न्यूज 24, मुंबई (16 मई): पश्चिम बंगाल में अंतिम चरण की वोटिंग से पहले जारी सियासी घमासान अपने चरम है। तमाम पार्टियां अपने सियासी फायदे नुकसान के हिसाब से इस बवाल पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है। इसी कड़ी में शिवसेना ने पश्चिम बंगाल में जारी तनाव और बवाल के लिए तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा है कि अमित शाह को रोकना और शोभायात्रा में काले झंडे दिखाना बड़ी गलती है। सामना में शिवसेना ने लिखा है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच तनाव पहले से ही चरम पर था, लेकिन अमित शाह की उपस्थिति में हिंसाचार का विस्फोट होगा, ऐसा नहीं लगा था। बंगाल की सभ्यता और संस्कृति को धब्बा लगानेवाला मामला मंगलवार को कोलकाता में घटित हुआ।

पश्चिम बंगाल में जारी महाभारत में समाना में शिवसेना ने लिखा है कि पश्चिम बंगाल की भूमि पहली बार रणभूमि में तब्दील हो गई। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की। प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ की सभाओं का श्रीमती बनर्जी ने शुरू से ही विरोध किया और कई जगह  हेलिकॉप्टर्स तक नहीं उतरने दिया। पश्चिम बंगाल तो हिंदुस्तान का एक हिस्सा ही है। वहां आने-जाने के लिए 'वीजा' की जरूरत नहीं पड़ती। पिछले कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल का सामाजिक मन बेचैन है। बांग्लादेश से लाखों घुसपैठिए पश्चिम बंगाल में आए हैं और 'वोट बैंक' की राजनीति के तहत ममता बनर्जी ने उन्हें पूरा संरक्षण दिया है। मुसलमानों के एकमुश्त वोटों के बल पर पश्चिम बंगाल को फिर से काबिज करने के उनके इस बेकार आत्मविश्वास को इस बार बीजेपी के हिंदुत्ववाद ने डगमगा दिया।

शिवसेना ने सामना में आगे लिखा है कि अमित शाह सत्ताधारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्हें रोकना ये पहली गलती और उनकी शोभायात्रा में निषेध जताना तथा काले झंडे दिखाना ये दूसरी गलती। अमित शाह की प्रचार यात्रा में श्रीराम, हनुमान उसी तरह रामायण के प्रसंगों की झांकी थी इसलिए मामला और भी भड़क उठा। ममता बनर्जी गरम दिमाग की हैं लेकिन राज करने वाले को सिर पर बर्फ और जीभ पर शक्कर रखकर काम करना होता है। पश्चिम बंगाल में हुए हिंसाचार से राज्य प्रमुख के रूप में ममता का नाम खराब हुआ है।

अमित शाह 'भगवान' नहीं हैं। उनके खिलाफ प्रदर्शन हुआ तो क्या बिगड़ गया ? ऐसा सवाल ममता बनर्जी ने पूछा है। अमित शाह ईश्वर नहीं होंगे लेकिन ममता भी देवी दुर्गा या 'संन्यासिन' नहीं। पश्चिम बंगाल में पहले मार्क्सवादियों ने हिंसाचार बोया, उसी में उनकी बलि चढ़ी। अब ममता बनर्जी भी यही कर रही हैं। इससे राज्य झुलसता है। देश के लिए यह घातक है।