एग्जिट पोल के बाद क्या है सट्टा बाजार का हाल, जानें- किसे बना रहा PM और क्या चल रहा है रेट ?

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (21 मई): लोकसभा चुनाव के नतीजों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। जनता से लेकर नेता तक जहां 23 मई की तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं नतीजों पर सटोरियों की भी नजरें भी टिकी हुई है। इस बात पर यकीन करना जरा मुश्किल है। लेकिन माना जा रहा है कि इन चुनाव पर अब तक एक लाख करोड़ का सट्टा लग चुका है। आइए सबसे पहले बात करते हैं है एग्जिट पोल के नतीजों के बाद मुंबई के सट्टा बाजार का क्या हाल है। अगर राज्यवार सीटों की बात करें तो यहां भी हर बड़े राज्य में बीजेपी का ही सिक्का चलता दिख रहा है। सट्टा बाजार में चल रही अटकलों के मुताबिक देश में कुल 542 लोकसभा सीट में से बीजेपी - 242 से 245 सीटें मिल सकती है। जबकि कांग्रेस को 80-90 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है। वहीं एनडीए की बात करें तो बहुमत का आंकड़ा 292-294 के बीच पहुंचने का अनुमान है। जबकि यूपीए को 120-122 सीटों तक समेट दिया जा रहा है। सट्टा बाजार के मुताबिक बीजेपी को यूपी में 72, महाराष्ट्र में 32, गुजरात में 22, बिहार में 12 और पश्चिम बंगाल में 12 सीटें मिलने की उम्मीद है।

सट्टा बाज़ार में चल रहे इस हार-जीत के खेल ने चुनावी माहौल को मसालेदार बना दिया है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों के दिग्गज नेताओं की नज़र सट्टा बाजार पर गड़ी हैं। हालांकि जैसे-जैसे मतगणना का वक़्त करीब आने लगेंगा। वैसे -वैसे सट्टा बाजार में सीटों ओर पार्टियों पर लगने वाले भाव मे भी कई उतार-चढ़ाव दिखने को मिलेंगे। हालांकि फिलहाल यहां पीएम पद के लिए मोदी के नाम का ही सिक्का चल रहा है। प्रधानमंत्री पद के लिये नरेंद्र मोदी के नाम पर 12 पैसे का भाव है तो राहुल गांधी के लिए 50 रुपए। वहीं ममता बनर्जी के लिए 60 रुपए तो मायावती के लिए 65 रुपए जबकि मुलायम सिंह यादव के लिए 80 रुपए का भाव चल रहा है।

ज्यादातर एग्जिट पोल बीजेपी की एक तरफा जीत के की भविष्यवाणी कर रहे हैं, लेकिन सट्टा बाजार की खबर ने बीजेपी की इस लहर पर हल्का ब्रेक लगाया है। खासकर मुंबई का सट्टा बाजार तो थोड़ा सहमा-सहमा सा है। सटोरियों की मानें तो इस बार भी आएंगे तो मोदी ही लेकिन बीजेपी का आंकड़ा पूर्ण बहुमत के पास पहुंचकर रुक सकता है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए उसे एनडीए के सहयोगियों की जरुरत पड़ने वाली है। मुंबई के सट्टा बाजार में बीजेपी को 260 से 262 सीटें मिलने का ट्रेंड दिख रहा है। कांग्रेस के लिए 68 से 70 सीट पर सट्टा लग रहा है। खास बात ये है कि दोनों के लिए एक जैसा भाव ही मिल रहा है। एग्जिट पोल के नतीजों के बाद मुंबई के सट्टा बाजार में अब सीधे-सीधे बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही टक्कर रह गई है जबकि दो दिन पहले तक मुंबई का सट्टा बाजार हर पार्टियों के लिए हर तरह के भाव से गुलजार दिख रहा था।

इसके पहले बीजेपी के अकेले  272 सीटें हासिल करने पर 3.50 रुपए का भाव चल रहा था जबकि एनडीए की सरकार बनने पर 12 पैसे का भाव दिखा था। सट्टा बाजार कांग्रेस की संभावित सरकार पहले भी सटोरियों की पहली पसंद नहीं थी। कांग्रेस के लिए अकेले 272 सीटें हासिल करने पर 80 रुपए का भाव चल रहा था। हालांकि एग्जिट पोल के नतीजों के बाद ये सारे सट्टे बंद कर दिए गए। मुंबई का सट्टा बाजार शुरु से ही मोदी के रंग में रंगा था और यहां कांग्रेस को लेकर ना तो पहले ज्यादा उत्साह था और ना अब दिख रहा है।  मुंबई के सट्टा बाजार को नरेंद्र मोदी के फिर से प्रधानमंत्री बनने का पूरा यकीन है। शायद इसीलिए यहां अगले प्रधानमंत्री के नाम पर सट्टा रोक दिया गया है। साफ है कि मुंबई के सट्टा बाजार को ना तो मोदी के अगले पीएम बनने पर कोई उलछन है और ना ही बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के फिर से आने पर कोई उहापोह ही है लेकिन एग्जिट पोल के नतीजों की तरह यहां बीजेपी की पूर्ण बहुमत वाली संभावित सरकार पर अभी कश्मकश है।

मुंबई, राजस्थान के नेटवर्क से चलने वाला इंदौर का सट्टा बाजार सत्ता के फाइनल में कांग्रेस और बीजेपी की हार-जीत पर दांव लगा रहा है। अनुमान है कि देश भर के सटोरियों के दम पर चल रहा ये कारोबार कई हजार करोड़ तक का हो सकता है। हालांकि जिस तरह EXIT POLL के नतीजे आए उसका कुछ खास असर यहां के सट्टा बाजार में देखने को नही मिल रहा। सट्टा बाजार मोदी और बीजेपी की तरफ एकतरफा झुका तो है लेकिन बीजेपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार की बजाए यहां NDA के गठबंधन वाली सरकार पर दाव लगाया जा रहा है। इंदौर के सट्टा बाजार की नजर भोपाल के उस दिलचस्प चुनावी जंग पर भी टिकी है, जिसकी तरफ हर किसी की नजर है। प्रज्ञा ठाकुर बनाम दिग्विजय सिंह की चुनावी युद्ध में इंदौर का सट्टा बाजार कांग्रेस की तरफ झुका है। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की जीत पर फिलहाल 1 रुपए के बदले 2 रुपए 50 पैसे का भाव चल रहा है जबकि दिग्विजय सिंह पर 1 रुपए के बदले सिर्फ 45 पैसे का ही भाव मिल रहा है। यानि इंदौर के सट्टा बाजार ने तो कम से कम दिग्विजय सिंह की जीत पर अपनी मुहर लगा ही दी है।

जैसे-जैसे चुनावी माहौल अपनी चरम पर पहुंचता है। वैसे-वैसे सियासी दल फलोदी के सट्टा बाजार का मूड समझने में जुट जाते हैं। चाहे विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव और या फिर हो IPLक्रिकेट माना जाता है कि फलोदी के सट्टा बाजार का आकलन सबसे सटीक होता है। फलोदी का सट्टा बाजार इस बार पूरी तरह मोदी के रंग में रंगा है और यहां के सट्टा बाजार के मुताबिक मोदी का आना तो जरुरी है लेकिन उनके साथ एनडीए सरकार की मजबूरी के भी आने की पूरी उम्मीद है। फलोदी सट्टा बाजार के सटोरियों की मानें तो लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 251से 255 सीटें मिल रही हैं, जबकि एनडीए का आंकड़ा 300 के पार होने की भविष्यवाणी है। यहां का सट्टा बाजार कांग्रेस को पिछली बार से ज्यादा सीटें तो दे रहा है, लेकिन किसी भी हालत में उसका आंकाड़ा 68-70 के बीच ही होने की उम्मीद जताई जा रही है। जबकि यूपीएक का आंकड़ा 100 से 105 रहने की उम्मीद है। फलोदी सट्टा बाजार बीजेपी की राजस्थान में 22-23 सीटें जीतने की भविष्यवाणी करता है। वहीं कांग्रेस को राजस्थान में केवल दो से तीन सीटों पर विजयी बताया जा रहा है। यानि सटोरियों को इस बात में कोई जरा भी शक-ओ- सुबा नहीं कि पिछली बार की तुलना में मोदी लहर थोड़ी कमजोर तो जरुर हुई है लेकिन आएंगे तो मोदी ही।  फलोदी के सट्टा बाजार में राजस्थान के हॉट सीट के उम्मीदवारों की जीत हार पर भी जोर-शोर से सट्टे का खेल जारी है। नागौर में हनुमान बेनीवाल के 50 पैसे भाव है। बीकानेर में अर्जुन मेगवाल के 20 पैसे का भाव है। जबकि जोधपुर से गजेंद्र शेखावत पर 35 पैसे के हिसाब से भाव चल रहा है। फलोदी सट्टा बाजार का इशारा बिल्कुल साफ है...मोदी के एक बार फिर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने में यहां कोई कंफ्यूजन नहीं, लेकिन बीजेपी की पूर्ण बहुमत सरकार को लेकर यहां का बाजार थोड़ा आराम-आराम से खेलने में मूड में दिखाई दे रहा है।

सट्टा बाजार में कोई भी खोटा सिक्का नहीं चलता माना जाता है कि नेताओं से भी आगे सट्टा कारोबारियों का अपना नेटवर्क है, जो आम लोगों से ज़्यादा पैनी नज़र और समझ रखने का दावा करते हैं। दावा तो ये भी है कि सटोरिए किसी भी उम्मीदवार की हार और जीत समय से पहले ही भांप लेते हैं। इसीलिए यहां से जो हवा बनती है वो बाज़ार के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों के माहौल को भी गरमा देती है।