फतेहपुर सीकरी में दिलचस्प जंग, इस बार यहां किसका होगा 'राज' तिलक ?

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (15 अप्रैल): दूसरे चरण के लिए चुनाव प्रचार जोरों पर है। दूसरे चरण में 13 राज्यों की 97 सीटों पर 18 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। इसमें उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सीट पर भी चुनाव होगा है। यहां फिलहाल त्रिकोणी मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस सीट से कांग्रेस के राज बब्बर, बीजेपी के राजकुमार चाहर और बीएसपी के भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित के बीच टक्कर देखी जा रही है। फतेहपुरी सीकरी सीट पर शिवपाल की नवगठित पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने मनीषा सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। यहां छह निर्दलीय उम्मीदवारों को मिलाकर कुल 15 नेता चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मुगल बादशाह अकबर के किले फतेहपुर सीकरी स्मारक और शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के लिए देश में मशहूर यह लोकसभा सीट 2009 में हुए आम चुनाव से पहले ही अस्तित्व में आई है। पहली बार यहां जीत का परचम बसपा सरकार में मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय ने फहराया था। 2014 के चुनाव में मोदी लहर में भाजपा के चौधरी बाबूलाल सांसद बने। इस बार भाजपा ने बाबूलाल के बजाए राजकुमार चाहर को टिकट दिया है। फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा सीटें आगरा ग्रामीण, फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़, फतेहाबाद और बाह आथी हैं। 2017 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सभी पांचों सीटों पर बीजेपी ने ही जीत दर्ज की थी।राज बब्बर को पहले कांग्रेस ने मुरादाबाद से टिकट दिया। फिर राज बब्बर ने सीट बदल दी। आगरा की फतेहपुर सीट पर पहुंच गए। यहां मुकाबला त्रिकोणीय है। लेकिन महागठबंधन के मुकाबले कांग्रेस ज्यादा मंजबूत है। शायद यही वजह है कि राज बब्बर मायावती से अपना उम्मीदवार हटाने की अपील कर रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो फिर फतेहपुर सीकरी का सियासी समीकरण बदल सकता है।2014 में हुए लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर करीब 16 लाख वोटर हैं। यहां 2 लाख जाट और करीब 1.50 लाख कुशवाहा वोटर हैं। इसके अलावा एक लाख से ज्यादा मुस्लिम मतदाता भी इस सीट पर हैं। ठाकुर और ब्राह्मण भी करीब 6 लाख हैं। हालांकि ठाकुर और ब्राह्मणों को परंपरागत रूप से बीजेपी का वोटर माना जाता है, लेकिन इस बार हालात कुछ बदले हुए हैं। राज बब्बर जाटव, कुशवाहा और मुस्लिमों वोटों के आधार पर अपनी जीत की संभावनाएं देख रहे हैं। इस इलाके में कुशवाहा जाति को निर्णायक माना जाता है। पिछले चुनाव में कुशवाहा तो बीजेपी के समर्थन में थे।आकड़ों पर गौर करें तो 2014 में एसपी और बीएसपी को मिलाकर 4.66 लाख से ज्यादा वोट मिले थे, जो बीजेपी के चौधरी बाबूलाल को मिले 426589 वोट से कहीं ज्यादा थे। 2014 के चुनाव में पूर्व सपा नेता अमर सिंह यहां से रालोद के प्रत्‍याशी थे, लेकिन उनकी जमानत जब्त हो गई थी। अमर सिंह को महज 2.5 फीसदी वोट हासल हुए थे।  2009 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी की सीमा उपाध्याय ने कांग्रेस के राज बब्बर को महज 10 हजार वोट के अंतर से हराया था।