EVM की चौकीदारी में मुस्तैद पार्टियों के कार्यकर्ता, समय काटने के लिए खेल रहे अंताक्षरी

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 मई):  23 मई को देशभर में वोटों की गिनती होगी। मतगणना से पहले पूरे देश में जहां-जहां स्ट्रॉन्ग रूम हैं, वहां सुरक्षा चाक चौबंद हैं। सभी दल ईवीएम पर नज़र गड़ाए हुए हैं। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर और चंदौली जैसे मामलों को आधार बनाकर विपक्ष चुनाव आयोग पर हमलावर है, लेकिन चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि सभी EVM कड़ी सुरक्षा में हैं। इसके बावजूद सियासी पार्टियों ने स्ट्रॉन्ग रूम यानी जहां EVM रखी गई हैं, वहां पर पूरी मुस्तैदी के साथ अपने लोगों को सुरक्षा में लगा रखा है। 

भोपाल में तो वक़्त बिताने के लिए बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर अंताक्षरी हो रही है, मुस्लिम कार्यकर्ता स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर ही अपना रोजा खोल रहे हैं। स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता साथ साथ बैठे नजर आए। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच अंताक्षरी शुरू हो गई। अगर आपके मन में सवाल है कि ये अंताक्षरी आखिर हो क्यों रही है तो जान लीजिए कि इस अंताक्षरी को खेलने के पीछे का असल मकसद है स्ट्रॉन्ग रूम की पहरेदारी के साथ-साथ समय बिताना। दोनों दलों के कार्यकर्ता स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी के लिए बैठे हैं और अंताक्षरी खेलकर ही समय काट रहे हैं। 

खंडवा में भी भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के कार्यकर्ता स्ट्रांग रूम के सामने दिन-रात चौकीदारी कर रहे हैं। पूरे देश में राजनीतिक दलों के लिए भले ही ईवीएम मशीन बड़ा मुद्दा हो, लेकिन खंडवा में यही ईवीएम मशीन की चौकीदारी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं के बीच आपसी प्रेम भाव, भाईचारा और एंटरटेनमेंट का अवसर उपलब्ध करा रही है। यहां मशीन की चौकीदारी कर रहे इन कार्यकर्ताओं के बीच साथ मे खाना-पीना और चाय पर चर्चा भी होती है। 

खंडवा में कांग्रेस की ओर से कार्यकर्ता स्ट्रॉन्ग रूम पर नजर रख रहे हैं, तो भारतीय जनता पार्टी की ओर से जिला अध्यक्ष खुद रात में स्ट्रॉन्ग रूम के सामने चौकीदारी कर रहे हैं। ऐसे में इन कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने भी स्वीकार किया कि हमारी विचारधारा में मतभेद है। लेकिन सामाजिकता में कोई मनभेद नहीं है। वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं की चुटकी लेते हुए भाजपा कार्यकर्ता कह रहे हैं कि अब कांग्रेस के लोग भी चौकीदार बनने लगे हैं, यही है मोदी का जादू।

चुनाव आयोग ने हर एक स्ट्रॉन्ग रूम पर एक पार्टी को तीन एजेंट रखने की अनुमति दी है। ये एजेंट एक साथ भी रह सकते हैं और चाहें तो बारी-बारी से भी निगरानी कर सकते हैं। हालांकि, गाजीपुर में बसपा प्रत्याशी अफजाल अंसारी द्वारा सवाल खड़े किए जाने के बाद वहां के प्रशासन ने एक स्ट्रांग रूप पर पांच लोगों को निगरानी करने की अनुमति दी है। यह व्यवस्था सिर्फ गाजीपुर के लिए ही है। 

बता दें कि ईवीएम को लेकर पूरे देश में महाभारत छिड़ी हुई है। ईवीएम की सुरक्षा पर विपक्ष सवाल उठा रहा है। ऐसे में हर किसी की नजर ईवीएम पर लगी हुई है। विपक्ष को डर है कि ईवीएम से छेड़छाड़ ना हो जाए। इसके चलते भोपाल से कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह पुरानी जेल परिसर में ईवीएम की सुरक्षा का जायजा लेने पहुंचे। उनके साथ पत्नी अमृता सिंह भी मौजूद थीं, वो करीब 20 मिनट स्ट्रॉन्ग रूम में रहे और वापस चले गए।

उत्तर प्रदेश के मेरठ में भी महागठबंधन के कार्यकर्ता चौबीसों घंटे ईवीएम की निगरानी में मुस्तैद दिख रहे हैं। यहां महागठबंधन के प्रत्याशी हाजी याकूब कुरैशी के समर्थक दूरबीन लेकर ईवीएम पर नजरें गड़ाए हुए हैं। इसी तरह चंदौली में भी स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर सुरक्षा चाक चौबंद है, लेकिन महागठबंधन के प्रत्याशियों का ईवीएम पर शक गहरा है, लिहाजा उनका वह सख्त पहरा दे रहे हैं। गोंडा में भी स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था है, मगर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता चारों पहर नजर रख रहे हैं।

पंजाब के संगरूर में भी आम आदमी पार्टी और उसके विरोधी पक्ष के नेता हरपाल चीमा के कार्यकर्ता भी ईवीएम की पहरेदारी में दिन-रात एक कर रहे हैं। ईवीएम सेंटर के बाहर कार्यकर्ताओं ने टेंट लगा लिया है और उनके दिन-रात काउंटिंग सेंटर के बाहर ही कट रहे हैं। दरअसल परिणाम से पहले ही विपक्ष कह रहा है कि ईवीएम को बदलने की कोशिशें की जा रही हैं। कई जगहों पर बवाल भी हुआ। इसके बाद देश के 4 हजार से अधिक स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर तमाम पार्टी के कार्यकर्ता पहरेदारी कर रही है।