भोपाल से प्रज्ञा ठाकुर ने अपना नामांकन वापस लिया

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (28 अप्रैल): मध्य प्रदेश की भोपाल से बीजेपी के लिए अच्छी खबर है। लोकसभा सीट से प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर ने अपना नामांकन वापस ले लिया है, लेकिन ये बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर नहीं बल्कि निर्दलीय प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर हैं। प्रज्ञा ठाकुर ने भोपाल लोकसभा सीट से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के समर्थन में अपना नाम वापस लिया है। दरअसल, भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं इसी सीट पर प्रज्ञा ठाकुर ने भी नामांकन पत्र दाखिल किया था। बीजेपी को आशंका थी कि एक ही नाम होने की वजह से गलतफहमी में आकर मतदाता कहीं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की बजाय प्रज्ञा ठाकुर के नाम के आगे वाला बटन ना दबा दें।

इसी आशंका के मद्देनजर प्रदेश बीजेपी के नेता और खुद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने खुद प्रज्ञा ठाकुर को मनाने और उनसे चुनाव न लड़ने की अपील की। बीजेपी और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की इस अपील के बाद  प्रज्ञा ठाकुर ने चुनाव ना लड़ने का फैसला किया। इसके बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने प्रज्ञा ठाकुर के घर पहुंचकर उन्हें भगवा शॉल भेंट करके उनका सम्मान भी किया। प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव ना लड़ने के ऐलान के बाद अब बीजेपी और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने राहत की सांस ली है।

आपको बता दें कि 'देश का दिल' कहे जाने वाले मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल के चुनावी जंग पर देशभर की नजरें टिक गई हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस के दिग्‍गज नेता और 10 साल तक राज्‍य के मुख्‍यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह कांग्रेस टिकट पर चुनाव रहे हैं, वहीं बीजेपी ने अपने इस 'किले' को बचाने के लिए अपने भगवा चेहरे साध्‍वी प्रज्ञा ठाकुर को मैदान में उतार दिया है। कट्टर हिंदू छवि वाली साध्‍वी प्रज्ञा ठाकुर वर्ष 2008 में हुए मालेगांव ब्लास्ट में आरोपी रह चुकी हैं और उन्‍हें दिग्विजय सिंह का धुर विरोधी माना जाता है। 

भोपाल में चुनावी जंग सॉफ्ट हिंदुत्‍व बनाम हार्डलाइन हिंदुत्‍व की हो गई है। ऐसे में यहां पर आस्‍था, धर्म और राष्‍ट्रवाद जैसे मुद्दे विकास के नारे को पीछे ढकेल सकते हैं। भोपाल सीट पर बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा बनाम कांग्रेस के सॉफ्ट हिंदुत्‍व के बीच लड़ाई हो गई है। हाल ही में दिग्‍गी राजा के मंदिरों के दौरे ने बीजेपी और आरएसएस को मजबूर कर दिया कि वह इसकी काट के रूप में साध्‍वी प्रज्ञा को 'हिंदुत्‍व' के चेहरे और 'राष्‍ट्र विरोधी ताकतों' के खिलाफ 'देशभक्‍त' के रूप में पेश करे।