#HaryanaPunjabManthan: 'पहले भी हुई है सर्जिकल स्ट्राइक, सेना पर न हो राजनीति'

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (3 मई): सात चरणों में होने वाले लोकसभा चुनाव के चार चरण खत्म हो चुके है। अभी तीन चरणों की वोटिंग बाकी है। तमाम दलों के दिग्गज वोटरों को रिझाने के लिए जमकर चुनाव प्रचार में जुटे हैं। इन चुनाव प्रचारों में राष्ट्रवाद, सर्जिकल स्ट्राइक, AFSPA जैसे मुद्दों की जमकर गूंज सुनाई दे रही है। न्यूज 24 के खास कार्यक्रम हरियाणा-पंजाब मंथन में लेफ्टिनेट जनरल (सेवानिवृत्त) डी एस हुड्डा भी शामिल हुए। साल 2016 में की गई सर्जिकल स्ट्राइक की अगुवाई कर चुके लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डी एस हुड्डा ने कहा कि मोदी सरकार ने सेना को सीमा पार हमले करने की अनुमति देने में एक बड़ा संकल्प दिखाया है, लेकिन उससे पहले भी सेना के हाथ कभी बंधे हुए नहीं थे। लेफ्टिनेट जनरल (सेवानिवृत्त) डी एस हुड्डा  ने राष्ट्र की रक्षा-सुरक्षा, विदेश नीति समेत तमाम मुद्दों पर जमकर अपना पक्ष रखा।आपको बात दें कि डीएस हुड्डा ने सितंबर 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद सीमा-पार सर्जिकल स्ट्राइक के समय सेना की उत्तरी कमान की अगुवाई की थी। हुड्डा अब राष्ट्रीय सुरक्षा पर कांग्रेस के कार्यबल का नेतृत्व कर रहे हैं। न्यूज 24 के खास कार्यक्रम हरियाणा-पंजाब मंथन में डी एस हुड्डा ने हर सवाल का बड़े ही विश्लेषण और तार्किक रुप से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि  मौजूदा सरकार ने सीमा पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में हवाई हमले की अनुमति देने में निश्चित रूप से एक बड़ा राजनीतिक संकल्प दिखाया है लेकिन इससे पहले भी आपकी सेना के हाथ बंधे हुए नहीं थे। डीएस हुड्डा ने कहा कि मैं इसे सर्जिकल स्ट्राइक नहीं बल्कि क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन कहता हूं और ये पहले से होता आ रहा है। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि बालाकोट जैसा एयर स्ट्राइक पहले कभी नहीं हुआ था। डीएस हुड्डा ने कहा कि हमें आतंकवाद के खिलाफ बड़ा प्लान बनाना पड़ेगा।  

सर्जिकल स्ट्राइक के हीरो लेफ्टिनेंट जनरल डी एस हुड्डा की बड़ी बातें... - मैं सर्जिकल स्ट्राइक नहीं बल्कि क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन कहता हूं। ये पहले भी होता आ रहा है- एयर स्ट्राइक पहले कभी नहीं हुई पर, क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन पहले भी हुआ है- सर्जिकल स्ट्राइक मुद्दा बनेगा, ये मैंने कभी नहीं सोचा था- हर सरकार आतंकवाद के खिलाफ लड़ती है। सर्जिकल स्ट्राइक एक बहुत कठिन ऑपरेशन था- पाकिस्तान से बातचीत जरुरी, बात से ही हल निकलना चाहिए। भावनाओं से इंटरनेशनल सम्बन्ध नहीं चलते- मसूद अज़हर को ग्लोबल आतंकी घोषित किये जाने के फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए- सभी सरकारों ने आतंकवाद के खिलाफ सेना को खुली छूट दी। इतिहास पर बात करने की ज़रूरत नहीं-  पुलवामा हमले की जांच जरूर होनी चाहिए, हमने अपनी गलतियों से सीखना पड़ेगा- हमें आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ा प्लान बनना पड़ेगा- मेरा मानना है कि AFSPA को रिव्यु करने की ज़रूरत है- AFSPA में कुछ भी एंटी-नेशनल नहीं। सेना को राजनीति से दूर रखना चाहिए- ये देश की सेना है, किसी व्यक्ति विशेष की नहीं। सेना का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। इससे सेना को ही नुकसान होगा- मैंने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन नहीं की- कश्मीर समस्या गंभीर, हमने कोई ठोस कदम उठाना पड़ेगा वरना ये समस्या और गंभीर हो जाएगी-  जम्मू-कश्मीर के सभी लोगों को शक की नज़र से देखना और आतंकवादी कहने से समस्या और बढ़ेगी- सेना का मनोबल बहुत ऊंचा है। मगर सेना का जब भी राजनीतिकरण होगा तब सेना को दिक्कत होगी- उम्मीद है चुनाव के बाद सेना का राजनीतिकरण खत्म हो जायेगा