मोदी-शाह की गुगली पर राहुल बोल्ड... कांग्रेस की हार के पांच बड़े कारण

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (23 मई): एकबार फिर नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। रुझानों में ही बीजेपी नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए को भारी बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है। रुझानों में बीजेपी और उसके सहयोगियों को जबरदस्त बहुमत मिल रहा है। एनडीए इस बार 2014 से भी बड़ा रिकॉर्ड बनाता दिख रहा है। मोदी लहर में 2014 में बीजेपी गठबंधन को 336 सीटें मिली थीं, जबकि इस बार अब तक आए रुझनों में बीजेपी गठबंधन इस आकंड़े को भी पार गई है। जबकि 2014 में उसे 282 सीटें मिली थीं। 2019 में भी बीजेपी को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत दिखाई दे रही है। 

वहीं 2014 की तरह ही 2019 में भी कांग्रेस की हालत पतली है। रुझानों कांग्रेस की अगुवाई यूपीए को 90 के आसपास सीटें मिलती दिख रही है। वहीं अकेले कांग्रेस 50 सीटों के आसपास सिमटती दिख रही है। आपको बता दें कि 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस के खाते में महज 44 सीटें आई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि बतौर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से कहां चूक हो गई।

कांग्रेस की हार की बड़ी वजह...

पीएम मोदी के राष्ट्रवाद के आगे कांग्रेस फेल

ऑपरेशन बालाकोट के बाद बीजेपी राष्ट्रवाद की लहर पर सवार हो गई जबकि कांग्रेस के कुछ इस पर सबूत मांगते नजर आए।  मोदी ने इस चुनाव में सेना और बीजेपी की छवि को एक कर दिया और ऑपरेशन बालाकोट के बाद बीजेपी का विरोध मतलब सेना का विरोध हो गया और राहुल गांधी इस अवधारण को तोड़ नहीं पाए।

राहुल का राफेल का मुद्दा फेल

पिछले 2 सालों से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील में पीएम मोदी पर सीधे घोटाले के आरोप लगाए और मंच से उन्होंने 'चौकीदार चोर' के नारे लगवाए। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस आरोप का मुकाबला आक्रमक तरीके से किया और चौकीदार चोर नारे के जवाब में उन्होंने 'मैं भी चौकीदार' का नारा लगाया। अब ऐसा लग रहा है कि राहुल गांधी का सीधे पीएम मोदी पर घोटाले का आरोप लगाना जनता को पसंद नहीं आया।

'घोटाला मुक्त' सरकार

पीएम मोदी के 5 सालों के कार्यकाल में किसी भी मंत्री पर एक भी घोटाले का दाग नहीं लगा। राफेल मुद्दे पर भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपने बयान पर सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगी थी। इसका असर पर भी निश्चित तौर पर वोटरों पर जरूर हुआ होगा।

कांग्रेस नहीं कर पाई गठबंधन

यूपीए को मजबूत करने की कवायद में कांग्रेस पूरी तरह से नाकाम साबित हुई। बिहार, केरल और तमिलनाडु में कांग्रेस को गठबंधन का फायदा नहीं मिला। लेकिन उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में कांग्रेस कोई गठबंधन नहीं कर पाई। हालांकि कांग्रेस को गठबंधन के बाद भी फायदा मिलता यह भी अपने एक सवाल है।

कांग्रेस का घोषणापत्र भी बड़ा कारण

ऑपरेशन बालाकोट के बाद जहां देश राष्ट्रवाद की लहर पर सवार था वहीं कांग्रेस के घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 में छेड़ाछाड़ नहीं और सेना को मिलने वाले आफास्पा को हटाने का जिक्र किया गया। जिसको पीएम मोदी ने जमकर मुद्दा बनाया।

महंगाई नहीं बना मुद्दा

इस लोकसभा चुनाव की खास बात यह थी कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के बाद भी जरूरी चीजों के दाम नहीं बढ़े।