नतीजों से पहले बिखरे कुनबे को जोड़ने की कवायद तेज, राहुल गांधी से मिले चंद्रबाबू नायडू

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (9 मई): 17वीं लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले विपक्षी पार्टियां अपने बिखरे कुनबे को जोड़ने की कवायद में शिद्दत से जुट गई है। इसी कड़ी में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलगू देशम पार्टी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक दोनों नेताओं ने चुनावी नतीजे आने के बाद अगर एनडीए को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो उस स्थिति में यूपीए कैसी भूमिका निभाएगा, इस विषय पर की। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी, मायावती और अखिलेश यादव जैसे नेताओं को यूपीए के साथ लाने के लिए चंद्रबाबू नायडू इनसे बातचीत करेंगे। इसी कड़ी में चंद्रबाबू नायडू आज खड़गपुर में ममता बनर्जी से मिलने वाले हैं।जानकारी के मुताबिक इस मुलाकात में दौरान चंद्रबाबू नायडू और राहुल गांधी ने वीवीपैट, पांच चरणों में हुए लोकसभा चुनाव के मतदान प्रतिशत तथा आंध्र प्रदेश में हुए लोकसभा चुनाव पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने चुनाव बाद गठबंधन की संभावनाओं पर भी बातचीत की तथा कमोवेश 21 मई को विपक्ष की बैठक बुलाने पर सहमत हुए। दोनों नेताओं की मुलाकात में लोकसभा चुनाव परिणाम से दो दिनों पहले 21 मई को विपक्षी दलों की बैठक आयोजित करने और चुनाव बाद गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा हुई। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव सात चरणों में हो रहे हैं। अब तक पांच चरणों के लिए मतदान हो चुका है। मतगणना 23 मई को होगी।आपको बता दें इस इससे पहले भी चंद्रबाबू नायडू ने विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने में अहम भूमिका निभाई थी। राहुल गांधी के साथ बैठक में चंद्रबाबू नायडू ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें और दूसरे नेताओं को ईवीएम पर भरोसा नहीं है। ईवीएम की गड़बड़ी रोकने के लिए कम से कम 50 प्रतिशत मतदान पर्चियों का मिलान ईवीएम से कराए जाने की मांग पहले चुनाव आयोग ने नहीं मानी थी, अब सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी है। ऐसे में सभी विपक्षी दल अब कौन सी रणनीति अपनायेंगे, दोनों नेताओं ने इस पर विस्तार से चर्चा की है। यह भी संभव है कि वोटों की गिनती से पहले सभी विपक्षी दल एक बार फिर बैठक करें। चंद्रबाबू नायडू पहले भी कह चुके हैं कि ईवीएम पर संदेह है। मतदाता का विश्वास केवल पेपर ट्रायल मशीनों के माध्यम से ही बहाल किया जा सकता है। जर्मनी जैसा उन्नत देश भी पेपर बैलेट का इस्तेमाल करता है। नीदरलैंड में भी अब बैलेट पेपर से ही चुनाव हो रहे हैं।