लोकसभा चुनाव: अपने अपराधों का अखबारों और टीवी में खुद प्रचार करेंगे दागी उम्मीदवार

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (14 मार्च): लोकसभा चुनाव 2019 का शंखनाद हो चुका है। चुनाव आयोग ने रविवार शाम को लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी। चुनाव सात चरणों में होंगे और 23 मई को नतीजे आएंगे। ऐसे में आगामी चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सभी पार्टियां जोर-शोर से जुट गई हैं।  

इस लोकसभा चुनाव में अपराधियों को अपने अपराधिक इतिहास का प्रचार प्रसार करना होगा। चुनाव के दौरान कम से कम तीन बार प्रचलित समाचार पत्रों में इसका विज्ञापन देना होगा साथ ही टीवी पर भी इसका प्रचार करना होगा। उच्चतम न्यायालय द्वारा आपराधिक प्रवृत्ति के उम्मीदवारों के संबंध में पारित आदेश के क्रम में फार्म 26 में बदलाव किया गया है। आपराधिक छवि के प्रत्याशियों को अपने अपराध का ब्यौरा बड़े और स्पष्ट अक्षरों में आयोग के फार्म में देना होगा। 

चुनावी मुद्दों की बात करें तो भाजपा पिछले चुनाव के अपने वादों की चर्चा शायद ही करे, लेकिन वह अपने पांच साल की सरकार के दौरान किए गए कामों मसलन स्वच्छता अभियान, जनधन खाते, मुद्रा ऋण, किसान फसल बीमा योजना, किसान सम्मान राशि, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना, मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, डिजिटल इंडिया, पांच लाख रुपए की आय पर आयकर छूट, किसानों को लागत का डेढ़ गुना मूल्य आदि को अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश करेगी। लेकिन उसे नोटबंदी, जीएसटी से अर्थव्यवस्था और कारोबार को हुए नुकसान, कर्ज में डूबे किसानों की दुर्दशा, रोजगार की खराब स्थिति, बिगड़ते सामाजिक सौहार्द, नीरव मोदी मेहलु चौकसी विजय माल्या की फरारी और राफेल पर लगातार सरकार की बढ़ती उलझनों के हमलों को भी झेलना होगा। 

भाजपा को भरोसा है कि मोदी की आक्रामक भाषण शैली और संवाद कला विपक्ष के सारे सवालों को खत्म कर देगी और जब मोदी कहेंगे कि हम घर में घुसकर मारेंगे तो राष्ट्रवाद की एसी आंधी चलेगी जिससे भाजपा की झोली वोटों और सीटों से भर जाएगी। वहीं विपक्ष को पूरी उम्मीद है कि इस बार लोग मोदी के भाषणों के झांसे में नहीं आएंगे और पिछले पांच सालों में नोटबंदी जीएसटी से जो तकलीफ उन्हें हुई है, उसका हिसाब चुनाव में लेंगे।

2014 के लोकसभा चुनाव में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को बहुत बड़ा नुकसान हुआ था। इसके बाद ही कांग्रेस को अब तक की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में पूरी कोशिश की है कि बीजेपी पर ऐसे आरोप न लग पाएं। यहां तक कि पीएम ने कई जगहों पर यह कहा भी कि उनके कार्यकाल में उनकी सरकार भ्रष्टाचार का कोई भी आरोप नहीं लगा है। लोगों ने नोटबंदी के कड़वे घूंट को भी इसलिए आसानी से पी लिया क्योंकि उन्हें लगता है कि पीएम भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं।