चुनावी 'चाणक्य' का 2019 में क्या होगा ?

पंकज मिश्रा, न्यूज 24, नई दिल्ली (11 मार्च): लोकसभा चुनाव 2019 का शंखनाद हो गया है। चुनाव आयोग ने रविवार को चुनाव का ऐलान कर दिया है। इस बार 7 चरणों में चुनाव होंगे और 23 मई को वोटों की गिनती होगी। मौजूदा सरकार का कार्यकाल 3 जून को खत्म हो रहा है। लिहाजा इससे पहले केंद्र में नई सरकार का गठन हो जाएगा। इस चुनावी समर में एक तरफ बीजेपी की अगुवाई में एनडीए गठबंधन मैदान में है तो दूसरी तरफ 'बिखरा' हुआ विपक्ष। हालांकि कांग्रेस और अन्य पार्टियां खुद को एकजुट कर, महागठबंधन की कवायद में जुटी है, जो फिलहाल मुमकिन होता नहीं दिख रहा है। लिहाजा विपक्ष के लिए चुनाव से पहले खुद को एकजुट करने की सबसे बड़ी चुनौती है। कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए कुछ क्षेत्रीय दल इस चुनावी जंग में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी को मात देना चाहता है, वहीं बीजेपी भी छोटे-छोटे दलों को साथ मिलकर फिर से सत्ता में काबिज होने की कोशिश में सिद्दत से जुटी है। हालांकि कुछ ऐसे भी दल हैं, जो फिलहाल किसी भी मोर्चे में शामिल नहीं हैं, उनकी कोशिश जनता का विश्वास जीतकर खुद सरकार बनाने की है।लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी के लिए बीजेपी ने इस बार भी कई क्षेत्रीय दलों से हाथ मिलाया है और रूठे सहयोगियों को भी मनाने की कोशिश की है। बीजेपी ने बिहार में जेडीयू से गठबंधन किया है तो महाराष्ट्र में नाराज चल रहे शिवसेना को भी मनाया। तमिलनाडु में पार्टी ने AIADMK और डीएमडीके के साथ गठबंधन किया है। हालांकि दक्षिण के बाकी राज्यों में बीजेपी अकेले चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। इसके साथ ही पार्टी ने पूर्वोत्तर में भी कई क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन किया है। उधर पांच साल बाद एकबार फिर से सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस भी जोर आजमाइश में जुटी है। महाराष्ट्र में कांग्रेस एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने जा रही है तो बिहार में आरजेडी, एलजेपी जैसे दल उसके साथ हैं। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ गठबंधन किया है। वहीं तमिलनाडु में कांग्रेस को डीएमके का साथ मिला है तो कर्नाटक में पार्टी जेडीएस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने जा रही है। पार्टी जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन कर सकती है। इसके साथ ही कई जगहों पर क्षेत्रीय पार्टियों ने भी एक-दूसरे से आपस में हाथ मिलाया है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी ने गठबंधन किया है। सियासी जानकारों की मानें तो इस चुनाव में  गैर-कांग्रेसी और गैर बीजेपी दलों की भूमिका अहम रह सकती है। सरकार बनाने में एसपी-बीएसपी, टीएमसी, बीजेडी, टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस, और टीआरएस जैसे दलों की भूमिका अहम हो सकती है।बीजेपी को 2014 के आम चुनाव में अकेले अपने दमपर 282 सीटें मिली थी, जबकि एनडीए को कुल 336 सीटें हांसिल हुई थी। 2014 के आम चुनाव में बीजेपी ने 'अबकी बार मोदी सरकार' का नारा दिया था तो इसबार 'एक बार फिर मोदी सरकार' का नारा दिया है। 2014 के आम चुनाव में 30 साल बाद केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी। देश की जनता ने दिल खोलकर बीजेपी और उसके सहयोगी पार्टियों का साथ दिया। आम चुनाव के वक्त बीजेपी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह थे, लेकिन मोदी सरकार में गृहमंत्री बनने के बाद राजनाथ सिंह को पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के विश्वासी अमित शाह के हाथ में पार्टी की कमान आ गई। इसके बाद हुए चुनावों में बीजेपी लगातार बढ़ियां प्रदर्शन करती रही और अमित शाह को चुनावी 'चाणक्य' का तगमा तक मिल गया।  2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले बीजीपी या एनडीए की 7 राज्यों में सरकार थी। वहीं 13 राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। सत्ता में आने के बाद धीरे-धीरे मार्च 2018 तक 21 राज्यों में बीजेपी और एनडीए की सरकार थी। इसके बाद यह आंकड़ा 18 तक पहुंच गया था। लेकिन पिछले दिनों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान हाथ से निकलने के बाद फिलहाल 15 राज्यों में बीजेपी और एनडीए की सरकार है।2014 में लोकसभा चुनाव के बाद चार राज्य महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए और इन चारों राज्यों में बीजेपी ने सरकार बनाई। लोकसभा चुनाव के ठीक एक साल बाद 2015 में बीजेपी को दिल्ली और बिहार में हार का समाना करना पड़ा। 2016 में चार राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। इसमें पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में बीजेपी का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। असम में बीजेपी सत्ता में पहुंची। 2017 का साल बीजेपी के लिए खास रहा। बीजेपी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड में सत्ता में आई। वहीं गोवा में कांग्रेस से कम सीट होने के बावजूद बीजेपी ने सरकार बनाई। गुजरात में कांग्रेस की टक्कर के बावजूद बीजेपी सत्ता की चाभी अपने पास रखने में कामयाब रही। हालांकि बीजेपी-अकाली दल गठबंधन को पंजाब में हार का सामना करना पड़ा। 2018 में कार्नाटक के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी सरकार बनाने में सफल नहीं हो पाई। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी का झटका लगा। फिलहाल बीजेपी 15 राज्यों में सत्ता में काबिज है। दूसरी तरफ 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस या तो खुद या फिर अपने सहयोगियों के साथ 14 राज्यों में सत्ता में थी। और अब यह आंकड़ा 6 हो गया है। हालांकि पिछले दिनों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में मिली जीत से कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ा है और मजबूत हुआ है।2014 के बाद से अबतक 30 लोकसभा सीटों पर उप-चुनाव हुए हैं, जिसमें बीजेपी की सीट 15 से घटकर 6 पर पहुंच गई। इतना ही नहीं बीजेपी उप-चुनाव में एक भी नई सीट नहीं जीत सकी। इस तरह लोकसभा उप-चुनाव में बीजेपी को 9 सीटों का नुकसान हुआ है। वहीं कांग्रेस 1 से 6 पर पहुंच गई जबकि क्षेत्रीय दलों के 18 उम्मीदवारों ने इन उपचुनावों में जीत हासिल की। ऐसे में सवाल उठता है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी 2019 के चुनाव में 2014 के प्रदर्शन को दोहरा पाएगी। सवाल ये भी है की चुनावी 'चाणक्य' कहे जाने वाले अमित शाह 2019 में नरेंद्र मोदी को फिर से केंद्र की सत्ता पर काबिज करा पाएंगे ?