यूपी के बाद बिहार में भी महागठबंधन से बाहर हो सकती है कांग्रेस, आरजेडी ने दिए संकेत !

सौरव कुमार, न्यूज 24, पटना (19 मार्च): उत्तर प्रदेश की तरह बिहार में भी महागठबंधन खटाई में पड़ती दिख रही है। सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक बिहार में भी महागठबंधन से कांग्रेस को साइड करने की तैयारी हो रही है और यहां भी यूपी वाले स्टाइल में सीटों का बंटवारा  हो सकता है। महागठबंधन के दोनों बड़े दल कांग्रेस और आरजेडी ही सीटों को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। नए फॉर्मूले पर महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर कल ऐलान होने की खबर है। महागठबंधन सूत्रों की तरफ से जानकारी आई है कि कल हर हाल में सीटों के बंटवारे का ऐलान हो जाएगा। अगर बुधवार की सुबह तक कांग्रेस नेताओं के साथ बात नहीं बनी तो शाम में हर हाल में कांग्रेस के बिना ही एलान किया जा सकता है। संभावना यही है कि राजद और  महागठबंधन के अन्य नेता कांग्रेस के लिए 8 सीट छोड़कर बाकी सीटों  की घोषणा कर सकते हैं। राजद ने कांग्रेस को 24 घण्टे का अल्टीमेटम दिया है। वहीं कांग्रेस 11 से कम के लिए तैयार नहीं है।

बिहार में महागठबंधन चुनाव के पहले ही महासंकट में घिर गया है। रविवार देर रात यह टूट के कगार पर खड़ा हो गया। कांग्रेस की प्रेशर पॉलीटिक्स, जीतनराम मांझी की महत्वाकांक्षा और लालू प्रसाद की चालाकी के चलते सीट बंटवारे का मसला नाजुक मोड़ पर पहुंचा और रास्ते बंद होते दिख रहे हैं। हफ्ते भर से दिल्ली में बैठे राजद नेता तेजस्वी यादव की कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से रविवार की बात-मुलाकात का भी नतीजा नहीं निकल सका। मामले की गंभीरता को समझते हुए देर रात तक अहमद पटेल प्रयास करते रहे। अगर बात नहीं बनी तो कांग्रेस आरएलएसपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और वामदलों के साथ गठबंधन बनाकर आगे बढ़ जाएगी। जबकि आरजेडी जीतनराम मांझी और मुकेश सहनी को साथ रखने की कोशिश में जुटा रहेगा। हालांकि कांग्रेस को भी खतरे का अहसास है और उसने बिहार के अपने सभी शीर्ष नेताओं को दिल्ली तलब कर लिया है। आज दिल्ली में बिहार के मसले पर कांग्रेस की अहम बैठक होने वाली है। इधर तेजस्वी यादव आज पटना लौट सकते हैं और आज वो आरजेडी के साथ खड़े दलों के आला नेताओं के साथ बैठक भी कर सकते हैं।

गौरतलब है कि कांग्रेस के साथ आरजेडी के संबंधों में खटास का अंदाजा दो दिन पहले ही तेजस्वी यादव के उस ट्वीट से लग गया था, जिसमें उन्होंने साथी दलों को चंद सीटों के लिए अहंकार से बचने की नसीहत दी थी। तेजस्वी के ट्वीट को कांग्रेस के लिए चेतावनी माना जाने लगा। सूत्रों का दावा है कि आरजेडी का यह स्टैंड कांग्रेस को नागवार लगा। रविवार दोपहर बाद से ही घटक दलों की चालें आड़ी-तिरछी होने लगीं थी। संबंध असहज दिखने लगे। उपेंद्र कुशवाहा को आनन-फानन में दिल्ली तलब कर लिया गया। कांग्रेस से सदानंद सिंह को भी बुलाया गया। गुजरात से लौटकर बिहार कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल भी दिल्ली पहुंच गए। हफ्ते भर से दिल्ली में जमे तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी को पटना लौटना था। सहनी तो लौट आए, किंतु राहुल से मुलाकात तय हो जाने के कारण तेजस्वी का निर्णय आखिरी वक्त में बदल गया। इधर, पटना से कांग्रेस की संभावित सीटों एवं दावेदारों की सूची लेकर अखिलेश प्रसाद सिंह रांची चले गए। उन्हें लालू तक बिहार कांग्रेस का संदेशा पहुंचाना है।

कांग्रेस के दबाव से आरजेडी का गुस्सा बढ़ता गया। शुरू में कांग्रेस ने महागठबंधन में 16 सीटों के लिए दबाव बनाया। वहीं आरजेडी ने कांग्रेस को 8 सीट का ऑफर दिया। साथ में यह संदेश भी देने की कोशिश की गई कि कांग्रेस सिर्फ अपनी चिंता करे और अन्य साथी दलों की चिंता आरजेडी करेगा। बात 11 सीटों पर बन गई तो कांग्रेस ने चालाकी करते हुए अपनी मनमाफिक सीटें चुन ली हैं। लालू की कोशिश कांग्रेस को कुछ वैसी सीटें भी देने की थी, जिनपर कड़ा मुकाबला हो सकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सहयोगी दलों पर दबाव बनाने की मंशा से अपनी ओर से 11 सीटों पर समझौते का बयान मीडिया को देने लगे। जो आरजेडी को रास नहीं आया। और बताया जा रहा है कि खेल यहीं से बिगड़ गया। दोनों ओर से दबाव की सियासत तेज हो गई। तीन सीटों पर मान चुके मांझी ने 5 सीटें की मांग फिर से शुरू कर दी। मुकेश सहनी भी दरभंगा की जिद पर दोबारा अड़ गए। पप्पू यादव की कहानी भी लटक गई। अनंत सिंह पर भी नए तरीके अड़ंगा डाल दिया गया।