लोढ़ा कमिटी की सिफारिश- BCCI में नेताओं को न मिले बड़े पद

नई दिल्ली (4 जनवरी): लोढा कमेटी ने BCCI में भ्रष्टाचार के मामले पर अपनी सिफारिश रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों को इसमें वोटिंग का अधिकार मिलना चाहिए और दो बार से ज्यादा किसी को प्रेसिडेंट नहीं बनाया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद बैकफुट पर है। इस रिपोर्ट में बीसीसीआई के संविधान और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों में कहा गया है कि बीसीसीआई में अभी टोटल 34 मेंबर्स हैं। उनमें कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने कभी कोई टूर्नामेंट ही नहीं खेला।

लोढा के सिफारिशों में कहा गया है कि 34 मेंबर्स में से कुछ ऐसी हैं जिनके पास न भूभाग है जैसे सर्विस, रेलवे। कई ऐसे राज्य हैं जिनमें एक से अधिक असोसिएशन हैं जैसे गुजरात और महाराष्ट्र। एक राज्य से एक प्रतिनिधि हो, यह अच्छा विचार है।

क्या है कमिटी की सिफारिशें BCCI में 9 मेंबर्स की अपेक्स काउंसिल हो। इसमें 5 इलेक्टेड मेंबर्स के अलावा प्लेयर्स एसोसिएशन के 2 रिप्रजेंटेटिव और 1 महिला मेंबर हो। इसके अलावा एक लोकपाल की नियुक्ति हो। वह सुप्रीम कोर्ट का जज हो या फिर हाईकोर्ट का रिटायर्ड जज हो।

फिक्स हो बड़े पदों के मानदंड रिपोर्ट के अनुसार BCCI में बड़े पदों के लिए मानदंड निर्धारित किया जाए। जैसे कोई भी 70 साल से ज्यादा का न हो। सभी भारत के नागरिक हों। कोई दिवालिया घोषित न हो, वह नेता या सरकारी कर्मचारी न हो और लगातार 9 साल तक बीसीसीआई में किसी पद पर न रहा हो। इन पदों पर कार्य करने वाले अधिकारियों का कार्यकाल अधिकतम 3 साल होना चाहिए। इसमें रोटेशन पॉलिसी भी लागू हो।

क्यों बनी कमिटी 2013 में आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस आरएम लोढ़ा की अगुआई में एक कमिटी बनाई थी। इस कमिटी द्वारा की गई कार्रवाई में पूर्व बीसीसीआई प्रेसिडेंट श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन और राज कुंद्रा पर आजीवन बैन लगा। यहां तक की दोनों की टीमों को भी 2 साल के लिए सस्पेंड कर दिया गया।