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बिहार शराबबंदी : 'भूत-प्रेत' भी कबूल करने लगे हैं दूसरे ऑप्शन्स

नई दिल्ली (12 अप्रैल): बिहार में नितीश कुमार ने शराब बंदी क्या लागू की, कि अब आम आदमी को क्या 'भूत-प्रेतों' ने भी दारू छोड़ दी है। अब वो भी खुश होने के आप्शंस एक्सेप्ट करने लगे हैं। सुनने में यह बात थोड़ी अटपटी सी लग रही होगी, लेकिन झाड़फूंक वालों की ओर से ये रास्ता अपनाया जाने लगा है। बिहार में अब से पहले दारू के बिना ‘भूत’ भगाने के बारे में कोई ओझा सोच भी नहीं सकता था। लेकिन, जब राज्य सरकार ने शराब बिक्री पर पाबंदी लगा दी, तो' 'भूत' भी बिना दारू पीये ही अपनी सवारी का शरीर छोड़ कर जाने लगे हैं।

ऐसे ढेर सारे उदाहरण संझौली के घिनहु ब्रह्म बाबा मंदिर में चल रहे चैत्र नवरात्र मेले में देखने को मिल जायेंगे। घिनहु ब्रह्म बाबा मंदिर में भूतों का मेला लगता है। मेला परिसर में एक हवन कुंड बना हुआ है। यहां हवन करने वालों की कतार लगी रहती है। ओझा चंद्रदेव प्रसाद का मानना है कि जिस किसी के भी शरीर पर 'भूत' होता है, वो इसी हवनकुंड में भस्म हो जाता है। घिनहु ब्रह्म बाबा की ही कृपा है कि सरकार द्वारा शराब की बिक्री पर रोक लगा देने के बाद भी भूत-पिशाच पीडितों का शरीर छोड़ दे रहे हैं।

करगहर की एक महिला के शरीर से भूत उतार रहे ओझा रामदेव राम ने अंगुली से इशारा करते हुए बताया कि सायर माई का स्थल सूखा है। पिछली बार यहां शराब का पौनार (धार) बह रहा था। आज वह जगह सूखी पड़ी है। बिक्रमगंज की रामरती देवी ने बताया कि उसकी बहू तरह-तरह की हरकत करती है।ओझा कह रहे हैं उसे नटीन ने पकड़ा है। साड़ी, पेटीकोट, ब्लाउज व श्रृंगार का सामान चाहिए। मनसदेवा भी सिर पर सवार रह रहा है। उसके लिए दारु चाहिए था। लेकिन, नहीं मिल रहा है, तो धोती-कुर्ता से काम चल जाएगा। पूजा के लिए सामान चाहिए ही। दारू नहीं है तो ओझा को भी दो हजार रुपये चाहिए। 

 


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