CII ने बताईं ये वजहें जिनमें पति को पत्नी की पिटाई का हक़

 

 

नई दिल्ली (26 मई) :  'पत्नी अगर पति की कोई बात नहीं माने तो पति उसकी हल्की पिटाई कर सकता है।'  ये सिफारिश पाकिस्तान में काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी (सीआईआई) ने अपने महिला संरक्षण बिल में की है। इस बिल को महिला विरोधी 

काउंसिल ने जो सिफ़ारिश की है उनके मुताबिक अगर पति की इच्छा के मुताबिक पत्नी कपड़े नहीं पहनती हैं तो भी पति को उसकी हल्की पिटाई करने का हक़ है। इसके अलावा पत्नी की हल्की पिटाई के लिए और और जो जायज़ वजह गिनाई गईं हैं उनमें शामिल हैं- बिना किसी धार्मिक वजह के पति से शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना, शारीरिक संबंध या मासिक धर्म का पीरियड खत्म होने के बाद ना नहाना, हिजाब नहीं पहनना, अजनबियों से बातें करना, अजनबियों को सुनाने के लिए ज़ोर से बातें करना, पति को बिना बताए लोगों की आर्थिक मदद करना।

सीआईसी ने ये भी कहा है कि प्राइमरी शिक्षा के बाद को-एजुकेशन पर प्रतिबंध होना चाहिए। सीआईसी के बिल में महिलाओं के मिलिट्री कॉम्बेट अभियानों में हिस्सा लेने पर भी बैन की सिफारिश है। ये भी कहा गया है कि महिलाओं को विदेशी प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करने पर मनाही होनी चाहिए।

सीआईआई अपने प्रस्तावित बिल को पंजाब विधानसभा के पास भेजेगी। बिल में ये भई कहा गया है कि महिला नर्सों को पुरुष मरीजों की देखभाल की इजाज़त नहीं होनी चाहिए। साथ ही महिलाओं के विज्ञापनों में काम करने पर भी रोक होनी चाहिए।

सीआईआई ने ये भी कहा है कि गर्भ धारण के 120 दिन बाद एबॉर्शन होता है तो उसे हत्या माना जाना चाहिए।

हालांकि बिल में महिलाओं को राजनीति में हिस्सा लेने की छूट होने की सिफारिश की गई है। साथ ही ये भी कहा गया है कि महिलाओं को माता-पिता की इच्छा के बिना निकाह करने की अनुमति होनी चाहिए।  

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ये बिल सीआईआई के विचाराधीन है। इस पर गुरुवार को और विचार होना है। सीआईआई के चेयरमैन मुहम्मद खान शीरानी काउंसिल के अन्य सदस्यों की सहमति लेने के बाद इन सिफारिशों पर अंतिम फैसला लेंगे।

बुधवार को जस्टिस (रिटायर्ड) मंज़ूर हुसैन गिलानी, नूर अहमद शाहताज़ और मोहम्मद अब्दुल्लाह ने प्रस्तावित बिल की कई सिफारिशों पर ऐतराज़ जताया था। उनका कहना है कि इस बिल को जेयूआई-एफ के एक सदस्य मुफ्ती इमादुल्लाह ने ड्राफ्ट किया है। और जब बुधवार को इस पर विचार किया गया तो काउंसिल की एकमात्र महिला सदस्य समीहा राहिल काज़ी मौजूद मौजूद नहीं थीं।

 

इस बिल को तब ड्राफ्ट किया गया जब सीआईआई ने पंजाब का 'विवादित प्रोटेक्शन ऑफ वीमेन अगेंस्ट वायलेंस एक्ट (पीपीडब्ल्यूए) 2015 को गैर-इस्लामी बताते हुए नामंजूर कर दिया था। सीआईआई पंजाब विधानसभा को अब अपना प्रस्तावित बिल भेजेगी।