Blog single photo

आंखों में कैंसर का पता लगाएगा यह स्मार्टफोन ऐप

देशभर में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से बच्चों की तबियत खराब हो जाती है, लेकिन यह बीमारी मनुष्य के शरीर में कब जन्म लेती है इसका पता नहीं चल पाता है। कैंसर का पता नहीं चलने से लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।

Image Source Google

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(13 अक्टूबर): देशभर में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से बच्चों की तबियत खराब हो जाती है, लेकिन यह बीमारी मनुष्य के शरीर में कब जन्म लेती है इसका पता नहीं चल पाता है। कैंसर का पता नहीं चलने से लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। टेक्नोलॉजी के बढ़ते क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने अब ऐसा स्मार्टफोन एफ तैयार किया है, जो बच्चों की आई कैंसर का पता बहुत ही आसानी से लगाएगा। इस ऐप का उपयोग पैरंट्स अपने बच्चों की फोटो स्कैन करने के लिए कर सकते हैं।

बच्चे की फोटो स्कैनिंग के दौरान यह ऐप उन प्रारंभिक लक्षणों की जांच कर जानकारी दे देगा, जिनसे भविष्य में बच्चे को आई कैंसर का खतरा होने की आशंका के बारे में पता चलता है। इतना ही नहीं, आई कैंसर के अतिरिक्त दूसरी आई प्रॉब्लम्स से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी भी इस ऐप के जरिए प्राप्त की जा सकती है।इस ऐप के जरिए रेटिनोब्लास्टोमा, जो आई कैंसर का एक रेयर लेकिन बहुत ही घातक रूप है, के बारे में भी बता देता है। यह स्टडी जर्नल साइंस अडवांसेज में प्रकाशित की गई है। इसमें ऐप का नाम CRADLE (ComputeR Assisted Detector LEukocoia)बताया गया है। यह ऐप आंखों के रेटिना से निकलने वाले एबनॉर्मल रिफ्लैक्शन, जिसे ल्यूकॉकोरिया या वाइट आई के नाम से जाना जाता है, को स्कैन कर लेता है। यह आंखों से जुड़ी कई बीमारियों का प्रारंभिक लक्षण है, जिनमें रेटिनोब्लास्टोमा भी शामिल है। 

यह रिसर्च अमेरिका में बायलर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने की। इनका मकसद ल्यूकोकोरिया को स्कैन करने के लिए एक ऐसी प्रभावी टेक्नीक डिवेलप करना था, जिसके जरिए पैरंट्स लगातार अपने बच्चों की जांच कर सकें। ताकि बच्चे तरह-तरह की आई डिजीज से सुरक्षित रह सकें। इस ऐप का परीक्षण करने के लिए शोधकर्ताओं ने बच्चों के 50 हजार से अधिक फटॉग्राफ्स को स्कैन किया और उनकी आंखों के रेटिना की जांच की। जिन बच्चों के फोटोज में आई डिसऑर्डर पाया गया उनमें से 80 प्रतिशत बच्चों को ल्यूकॉकोरिया की समस्या थी।

खास बात यह रही कि इस ऐप ने जिन बच्चों में आंखों से संबंधित बीमारी की खोज की उनकी फोटोज उन्हें क्लिनिकल ट्रीटमेंट मिलने से करीब 1.3 साल पहले खींची गईं थी। यानी यह बात साफ है कि जब तक हम लोग खुद से यह बात जान पाएं कि बच्चे को आंखों से संबंधित को परेशानी हो रही है और उसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए CRADLE इस बीमारी के बारे में इसके शुरुआती लक्षणों को बच्चे के फोटो से जांचकर ही बता देगा।

Tags :

NEXT STORY
Top