वसुंधरा सरकार में हुआ बड़ा घोटाला, 80 रुपए की LED 972 में खरीदी

केजे श्रीवत्सन (7 फरवरी): राजस्थान में बिजली बचाने के नाम पर जनता को सस्ती दर पर दी जाने वाली एलईडी लाईट खरीद का एक बड़ा घोटाला सामने आया है। आरोपों पर विश्वास करें तो सरकार के द्वारा जनता को 80 रुपए में बांटी जा रही एलईडी लाईट्स को जलदाय विभाग ने केंद्रीय भंडार से दस गुना से भी अधिक दामों पर खरीद कर सरकार को करोड़ों रूपये की चपत लगाई है। जबकि नियमानुसार केन्द्रीय भंडार राजस्थान सरकार के जलदाय विभाग को कोई चीज बेच ही नहीं सकता है।

जलदाय विभाग के अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने जनता को 80 से 100 रूपये में बेचीं जाने वाली एलईडी 972 रुपए प्रति बल्ब से भी अधिक के दाम पर ख़रीदा। इसमें इनका साथ दिया केन्द्रीय केंद्रीय भंडार के अधिकारीयों ने, जिनसे की जलदाय विभाग के अधिकारियों ने पूरे राज्य में स्थित अपने दफ्तरों, स्ट्रीट लाईटों और अपने कर्मचारियों के सरकारी घरों में लगाए जाने वाले एलईडी लाईटों की रेट को वेरिफाई करवाए बिना 10 गुना रेट पर खरीदा और केंद्रीय भंडार के जरिए ठेकेदार को भुगतान भी कर दिया। यानी महज कुछ लाख रूपये की इन लाईटों के लिए इन्होंने पिछले 2 साल में केंद्रीय भंडार से 5 करोड़ में इन्हें खरीद कर सरकारी खजाने से जमकर बंदरबांट किया।

मामला सामने आया तो इसकी जांच एंटी करप्शन ब्यूरो यानी (ACB) को सौंद दी गई। ACB के अधिकारी जब केन्द्रीय भंडार जांच करने पहुंचे तो मैनेजर और दुसरे बड़े अधिकारी वहां से फरार हो गए। ACB ने इस खरीद-फरोख्त से जुड़े सभी दस्तावेज जब्त कर लिए हैं।

इस मामले में जयपुर सिटी सर्किल (दक्षिण व उत्तर), दौसा सहित अन्य सर्किलों के अधिशाषी अभियंताओं के साथ सप्लायर कंपनी और केन्द्रीय भंडार के अधिकारीयों की भूमिका सामने आई है। यह भी पता चला है कि विभाग से ऑर्डर, सप्लाई और पेमेंट लाने का काम प्राइवेट कंपनी को इन्होंने दिया था व बिलिंग से सप्लाई करने पर केंद्रीय भंडार को भी घपले की राशि में से हिस्सा मिलने के साथ 2 फीसदी का कमीशन मिला। हालांकि अभी इसे 3 से 4 करोड़ रूपये का ही घपला माना जा रहा है, लेकिन जिस तरह से दस्तावेज मिले है उससे इस राशि 10 से 12 करोड़ हो सकती है।