पहली बार बना किन्नर अखाड़ा, लक्ष्मी बनीं महामंडलेश्वर

उज्जैन (3 मई): उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ कुंभ में हिस्सा लेने आए किन्नर अखाड़ा का पहला महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को बनाया गया। सोमवार को विधि-विधान के साथ लक्ष्मी ने महामंडलेश्वर की पदवी ग्रहण की। इधर किन्नरों के इस कदम से अखाड़ा परिषद नाराज हो गया है।

देश में साधु-संतों के 13 अखाड़े हैं, जिनमें किन्नर अखाड़ा शामिल नहीं है। इसके बावजूद किन्नर अपने अखाड़ों की ही तरह सिंहस्थ कुंभ में सुविधाएं दिए जाने की मांग करते रहे हैं, मगर वे इसमें सफल नहीं हुए हैं। इस बार के सिंहस्थ कुंभ में किन्नर अखाड़े को जमीन आवंटित की गई। इस अखाड़े ने अपनी शोभायात्रा भी निकाली थी।

अखाड़ा परिषद ने इस पूरे समारोह पर सवाल उठाए हैं और लक्ष्मी को महामंडलेश्वर की मान्यता देने से इनकार कर दिया है। कुंभ में जब किन्नरों की पेशवाई यानि शोभा यात्रा निकली तो देखने वाले दंग रह गए। इतना विशाल जनसैलाब कि देखने वालों ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं। शाही स्नान में भी किन्नर अखाड़े के रंग देखते ही बन रहे थे। इस बीच देश भर से आए किन्नरों ने लक्ष्मी नारायण को अपना महामंडलेश्वर चुनकर पट्टाभिषेक किया। महामंडलेश्वर बनने के बाद लक्ष्मी ने साफ कर दिया कि उन्हें किसी अखाड़े से मान्यता की जरूरत नहीं है। किन्नरों को प्राकृतिक मान्यता मिली हुई है।

बहरहाल दूसरे अखाड़ों की तरह किन्नर अखाड़े का स्वरूप भी तय हो गया है। किन्नर अखाड़े का शस्त्र तलवार होगा। शिव पुराण अखाड़े का शास्त्र होगा। लक्ष्मी ने 5 किन्नरों को पीठाधीश और महंत भी नियुक्त किया। किन्नरों के अपनी अलग धर्मसत्ता चलाने पर अखाड़ा परिषद और साधु संत नाराज हैं। परिषद ने न तो महिला सन्यासियों को मान्यता दी है और न ही किन्नर अखाड़े को।