बेब्बे, फायर रुक जावगा तो घर जरूर आवंगा...!



नई दिल्ली (23 अक्टूबर):
गुरनाम की मां ने दो दिन पहले ही फोन किया था। बोली थी बेटा एक दिन को घर होजा। मां को ढाढस बंधाते हुए गुरनाम ने कहा था, 'बेब्बे, फायर रुक जावगा तो घर आवंगा...!' गुरनाम के ये आखिरी शब्द याद करके मां का बुरा हाल है...! हालांकि 
गुरनाम के घायल होने के बाद बीएसएफ ने जवाबी कार्रवाई की और सात पाकिस्तानी रेंजर्स एक  आतंकी को मौत के घाट उतार दिया। पांच साल पहले बीएसएफ में शामिल हुए सिख परिवार में जन्मे गुरनाम जम्मू के रणवीरसिंह पुरा इलाके के रहने वाले हैं। गुरनाम की दिली ख्वाहिश थी कि बीएसएफ में शामिल हो, उनके परिवार को इस बात पर गर्व है कि यह बीएसएफ का हिस्सा हैं। इनके भाई और इनके बहन अपने आदर्श की तरह देखते हैं। गुरनाम के पिता बस ड्राइवर हैं। दो दिन पहले ही घर से फोन आया था। उसने कहा कि अभी पाकिस्तान की तरफ से हर रोज फायर आ रहा है। जैसे ही फायरिंग रुकेगी तो छुट्टी लेकर घर आयेगा। गुरनाम घर आया...मां-बाप का नाम रोशन करके आया...हमेशा-हमेशा के लिए अमर होकर वापस आया।