बस एक और आतंकी ढेर होते ही घाटी से खत्म हो जाय़ेगा लश्कर-ए-तैयबा

नई दिल्ली (19 दिसंबर): कश्मीर में आतंकवाद को फैलाने वाला लश्कर-ए-तैयबा अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। उसकी आखिरी उम्मीद है 20 साल का आतंकी जुनैद अहमद मट्टू। दक्षिण कश्मीर के रहने वाले जुनैद को लश्कर ने कमांडर बनाया है क्योंकि उसके साथ के सभी आतंकी कमांडरों को सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया है।इसके मारे जाने या पकड़े जाने के बाद कश्मीर से लश्कर-ए-तैयबा का वजूद खत्म हो जायेगा। जुनैद मट्टू को कमांडर बनाने के पीछे मकसद ये है कि नोटबंदी के बाद आतंकी संगठनों से दूर भाग रहे नौजवानों को फिर से आतंक के रास्ते पर धकेला जा सके। मट्टू को कश्मीर का दूसरा बुरहान वानी कहा जा रहा है। इस खतरनाक आतंकी को पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा ने दक्षिण कश्मीर का कमांडर बनाया है।

जुनैद मट्टू की नियुक्ति लश्कर के कमांडर माजिद ज़रगर के मारे जाने के बाद हुई है। जरगर और उसके दो साथी पिछले हफ्ते कुलगाम में मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए थे। जरगर का मारा जाना सुरक्षाबलों के लिए बड़ी कामयाबी थी, तभी से ये कयास लगाए जा रहे थे कि लश्कर के आका जल्द ही माजिद ज़रगर की जगह किसी को बिठाएंगे और लश्कर ने माजिद की जगह उस आतंकी को बिठाया है जो दो साल पहले तक कॉलेज जाता था।

20 साल का खूंखार आतंकवादी जुनैद मट्टू पहली बार चर्चा में तब आया, जब 4 जून 2016 को वो अपने एक साथी के साथ अनंतनाग में आतंकी हमले को अंजाम देता नजर आया। एक पुलिस पोस्ट पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने के बाद मट्टू एक कार में सवार होकर फरार हो गया था। इस हमले में बीएसएफ के 3 जवान शहीद हो गए और 7 घायल हो गए थे।