इस एप के जरिए आतंकी रच रहे हैं बड़ी साजिश

नई दिल्ली (6 जून): सीमा पर आतंकी साज़िश को अंजाम देने और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए आतंकी हाईटेक रास्ता अपना रहे हैं। लश्कर के एक आतंकी की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ है कि आतंकी एक दूसरे से बात करने के लिए ऐसे एप्लीकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं जो सुरक्षा एजेंसियों के रडार की पकड़ से बाहर हैं।

लश्कर-ए-तैयबा के गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में बेहद चौकाने वाला खुलासा हुआ है। जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने वाले आतंकी एंड्रॉइड एप के जरिये भारतीय सेना को चकमा दे रहे थे। घुसपैठियों के स्मार्टफोन में 'कैलकुलेटर' नाम का एक एप मिला है। इस एप की मदद से घुसपैठिये दहशतगर्द पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बैठे अपने आकाओं से संपर्क में रहते थे। यानी आतंकी अब ज्यादा मुस्तैदी से घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं, वो मारक हथियारों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक से भी लैस होकर आ रहे हैं।

इस एप की खासियत ये है कि इसमें बातचीत इटरसेप्ट नहीं हो पाती है। ये एप्लीकेशन स्मार्टफोन को स्मार्ट रेडियो में तब्दील कर देती है। इस एप की मदद से स्मार्टफोन से सिग्नल जारी होते हैं। रेंज में मौजूद, इस ऐप से लैस दूसरा स्मार्ट फोन इन सिग्नल को रिसीव कर लेता है। ये एप बिना जीपीएस और वाई-फाई के काम करती है। आतंकी इस एप के जरिये अपने मैसेज और लोकेशन शेयर करते हैं।

'कैलकुलेटर' नाम की ये एप्लीकेशन 2005 में अमेरिका में आए कटरीना तूफान में फंसे लोगों की मदद के लिए इजाद की गई थी। लेकिन अब इसका इस्तेमाल पाकिस्तानी घुसपैठिये भारतीय सेना को धोखा देने में कर रहे हैं। आतंकियों की इस नई चाल से अब तक भारतीय सेना बेखबर थी, लेकिन अब इसका तोड़ ढूंढा जा रहा है। नए खुलासे के बाद अब सेना की सिग्नल यूनिट इसका तोड़ ढ़ूंढ़ने के लिए नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन की मदद ले रही है।