भारत-पाक बॉर्डर पर अब हाईटेक तरीके से हो रही सिक्युरिटी, BSF को मिली 'लेजर वॉल्स'

नई दिल्ली(28 अप्रैल): पंजाब से सटे भारत-पाक सीमा पर अब 'लेजर वॉल्स' के जरिए सिक्युरिटी की जा रही है। इसका मकसद पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठ को रोकना है। 

बीएसएफ के एक सीनियर अफसर के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में ऐसी 4 और लेजर बीम इंटरनेशनल बॉर्डर पर लगाई जाएंगी। बीएसएफ ने ही इन्हें ‘लेजर वॉल्स ’ नाम दिया है। जिन आठ दीवारों का इस्तेमाल अभी किया जा रहा है, उनसे मिले नतीजों को लेकर बीएसएफ खुश है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात से लगने वाली पाकिस्तान बॉर्डर के कुछ इलाकों में इन लेजर दीवारों का इस्तेमाल किया जा रहा।

पठानकोट में हुए आतंकी हमले के बाद बीएसएफ से इन ‘लेजर वॉल्स’ को जल्द से जल्द से इंस्टॉल करने को कहा गया था। अब जम्मू, गुजरात के अलावा वेस्ट बंगाल में बांग्लादेश बॉर्डर पर भी इसी तरह की निगरानी का प्लान है। बॉर्डर पर होने वाली किसी भी गलत हरकत पर नजर रखने के लिए फिलहाल 8 इन्फ्रा रेड और लेजर बीम लगाई गई हैं। 

लेजर वॉल्स को इंस्टॉल करने का फैसला दो साल पहले बीएसएफ ने लिया था। पंजाब में यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि पंजाब से आतंकी घुसपैठ की घटनाएं बढ़ती जा रही थीं। पंजाब के बामियाल सेक्टर में तो खतरा ज्यादा है।  इस इलाके में नहरें और नदियां हैं। इसके अलावा घने पेड़ और ऊंची घास है। इसी वजह से आतंकियों को घुसपैठ करने में आसानी होती है। 

लेजर बीम्स की रेंज काफी लंबी होती है। इसके अलावा ये काफी दूर तक रोशनी कर सकती हैं। पठानकोट पर हमला करने वाले आतंकी बामियाल एरिया से ही घुसे थे। इसके बाद होम मिनिस्ट्री और बीएसएफ ने लेजर वॉल्स बनाने की स्ट्रैट्जी पर तेजी से काम किया। जानकारी के मुताबिक, 45 लेजर वॉल्स पंजाब और जम्मू-कश्मीर से लगने वाली पाकिस्तान बाॅर्डर पर इंस्टाॅल की जानी हैं। इसके लिए ब्लूप्रिंट तैयार किया जा चुका है। 

सरकार की कोशिश इंटरनेशनल बॉर्डर पर होने वाली घुसपैठ को किसी भी कीमत पर रोकना है। इसके लिए टेक्नोलॉजी पर फोकस किया जा रहा है। जम्मू में स्मार्ट सेंसर भी इंस्टॉल किए जा रहे हैं। एक बीएसएफ अफसर का कहना है कि लेजर वॉल्स पर नजर रखने के लिए सिग्नल कमांड बनाए गए हैं।  कोहरे या रात में भी ये सिग्नल कमांड आसानी से काम कर सकेंगे।