International Tiger Day: भारत के लिए गुड न्यूज, बढ़ रहे हैं बाघ

नई दिल्ली, (29 जुलाई): 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (वर्ल्ड टाइगर डे) के रूप में मनाया जाता है। टाइगर दिवस बनाने का उद्देश्य लोगों को बाघों की सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरुक करना है। बाघ (रॉयल बंगाल टाइगर) भारत का राष्ट्रीय पशु है इसिलिए इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। भारत में 1973 से ही प्रोजेक्‍ट टाइगर (बाघ परियोजना) के तहत बाघों की बचाने की काम किया जा रहा है। अब तक इस परियोजना के अधीन 27 बाघ के आरक्षित क्षेत्रों की स्‍थापना की गई है जिनमें 37,761 वर्ग कि.मी. क्षेत्र शामिल है।

आजादी से पहले देश में बाघों की संख्या 40 हजार थी जो अब बेहद चिंताजनक हालत में पहुंच गई है। पिछले सौ वर्ष में दुनियांभर से 97 फीसदी बाघ खत्म हो चुके हैं और भारत में भी बाघ संकट में हैं। लेकिन लुप्त होते बाघों की चिंता के बीच उम्मीदों की दहाड़ पूरी दुनिया में जहां से सुना जा सकता है वो है भारत। दुनिया के कुल 70 फीसदी बाघ भारत में रहते हैं। जो भारत के 17 राज्यों में हैं। देश में बाघों की तादाद 2008 में 1,411 थी, जो 2014 में बढ़कर 2,226 हो गई है। बाघों की संख्या के मामले में भारत के बाद दूसरे स्थान पर रूस में 433 बाघ हैं। इंडोनेशिया में 371 तो मलेशिया में 250 बाघ हैं।

हालांकि दुनियाभर में बाघों की संख्या कम हो रही है। थाईलैंड के बाघ मंदिर में 40 शावकों के शव मिलने के बाद बाघों की संख्या को खासा नुकसान हुआ था। पिछली बार यानि 2010 में जब बाघों की गिनती की गई थी तब दुनिया में केवल 3,200 बाघ रह गए थे। लेकिन 2002 तक भारत में 3,700 बाघ थे जो अब काफी घट गए हैं। हालांकि कुछ राज्यों में इनकी संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।

2010 में हुई वर्ल्ड टाइगर डे की शुरुआत - हर साल की तरह इस साल भी 26 जुलाई को 'वर्ल्ड टाइगर डे' मनाया जा रहा है। - इसे दुनियाभर के देशों में बाघों की लगातार घटती संख्या रोकने के लिए लोगों के जागरूक किया जाता है। - इसकी शुरुआत 29 जुलाई 2010 में संत पिटर्सबर्ग में आयोजित टाइगर समिट के साथ ही शुरू हुई। - दुनिया के 14 देशों ने इसमें भाग लिया जहां बाघ पाए जाते हैं। - टाइगर-डे मनाने का उद्देश्‍य़ बाघ संरक्षण के प्रति लोगों को जागरुक करना व बाघ के लिए अच्छे वासस्थलों को विकसित करना है। - पूरी दुनिया में 3,890 बाघ बचे हैं जिनमें से सबसे ज्यादा 2,226 भारत में है।

भारत में बाघों की संख्या - देश में बाघों की तादाद 2008 में 1,411 थी, जो 2014 में बढ़कर 2,226 हो गई है। - भारत में दुनिया के कुल 70 फीसदी बाघ रहते हैं। जो देश के 17 राज्यों में हैं। - जिसमें पिछले 3 सालों में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। - जहां दुनियाभर में बाघों की संख्या तेजी से घट रही है वहीं भारत में बढ़ रही है। - भारत में बाघों की घटती जनसंख्‍या की जांच करने के लिए अप्रैल 1973 में प्रोजेक्‍ट टाइगर (बाघ परियोजना) शुरू की गई। - अब तक इस परियोजना के अधीन 27 बाघ के आरक्षित क्षेत्रों की स्‍थापना की गई है जिनमें 37, 761 वर्ग कि.मी. क्षेत्र शामिल है। - आज हमारे पास भारत के 80 फीसदी बाघों की तस्वीरें हैं। - अगर 2008 से तुलना की जाए, तो ताजा आंकड़े बेहतरीन लगते हैं। - देश में बाघों की गिनती हर तीन साल बाद नैशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) करती है। - बाघ इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की मानें तो कर्नाटक, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और केरल में बाघों की संख्या बढ़ी है। - टाइगर सेंसस के अनुसार कर्नाटक में सबसे ज्यादा टाइगर हैं जो कि 1.5 साल और उससे ज्यादा की उम्र के हैं। - कर्नाटक में इस उम्र के 408 बाघ हैं और उसके बाद दूसरा नंबर उत्तराखंड का है जहां पर 340 बाघ हैं। - मध्य प्रदेश में 308 बाघ, तमिलनाडु में 229 और महाराष्ट्र में 190 हैं। - असम में 167, केरल में 136 और यूपी में 117 हैं। - टाइगर सेंसस रिपोर्ट में बाघों के इलाके छह श्रेणियों में बांटे गए थे। - ये थे - शिवालिक-गंगा का मैदान, मध्य भारत का इलाका, पूर्वी घाट, पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्वी पहाड़ियां और ब्रह्मपुत्र का मैदान और सुंदरबन। - दूसरी ओर इस साल यानि पिछले सात महीने में 70 से ज्यादा बाघों की मौत हुई है  - यानि हर महीने 10 बाघों की मौत हो गईं. इसमें से 30 बाघ शिकारियों हाथों मारे गए. - सबसे ज्यादा 20 बाघ मध्यप्रदेश में मरे, उसके बाद उत्तराखंड में 10, महाराष्ट्र में 8, कर्नाटक में 7, तमिलनाडू में 6 और केरल में 5 बाघों की मौत हुई।

बाघों के बारे में दिलचस्प जानकारी - वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट के नियम के तहत वन विभाग जिस टाइगर को जहां से पकड़ता है उसका नाम उसी जगह पर रखा जाता है। - बाघ के पैर बहुत मजबूत होते हैं, बाघ मारने के बाद भी अपने पैर पर खड़ा रह सकता है। - बाघ अगर सामने आ जाए तो डरने और भागने की जगह एक जगह चुपचाप खड़े हो जाएं।  - बाघ की तरफ बिल्कुल भी ना देखें ऐसा करने से आप बाघ के अटैक से बच सकते हैं। - बाघ पांच मीटर की ऊंचाई और छह मीटर की चौड़ाई को आसानी से फांद सकता है - बाघ का वजन 300 किलो और दिमाग का वजन 300 ग्राम होता है - बाघ एक अच्छा तैराक होता है, वह छह किलो मीटर तक अच्छे से तैर सकता है - बाघ के दांत में उसकी जिंदगी होती है, बाघ का कैनाइन दांत अगर टूटा तो बाघ की जान जा सकती है - बाघों के शरीर पर 100 से अधिक धारियां होती हैं, और सभी धारियां अलग होती हैं - एक समय में बाघ की नौ उपजातियां पाई जाती थीं मगर अब यह केवल छह रह गई हैं