एम्स ने फिट बताकर किया डिस्चार्ज, लालू यादव ने कहा- मेरे खिलाफ साजिश

नई दिल्ली ( 30 अप्रैल ): चारा घोटाले में सजा पाए और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सोमवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने फिट बताकर डिस्चार्ज कर दिया। जेल की सजा काट रहे लालू यादव दिल्ली से रांची के लिए रवाना हो गए हैं। नई दिल्ली स्टेशन से रवाना होने के दौरान लालू यादव के समर्थकों ने उनके पक्ष में नारे बाजी की। लालू यादव ने खुद को अभी भी बीमार बताते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम नरेंद्र मोदी के इशारे पर उन्हें डिस्चार्ज किया गया है।

इससे पहले लालू प्रसाद यादव ने एम्स के निदेशक को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें अभी डिस्चार्ज नहीं किया जाए। वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुए हैं. हालांकि उनकी इस अपील को नहीं माना गया और एम्स ने लालू को छुट्टी दे दी है। मालूम हो कि चारा घोटाला में सजा काट रहे आरजेडी प्रमुख लालू यादव की तबीयत बिगड़ने के बाद रांची के रिम्स अस्पताल में इलाज चल रहा था, जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए उनको एक महाने पहले दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। 

लालू भले ही स्वस्थ न होने की बात कह रहे हों लेकिन एम्स अस्पताल का कहना है कि उनकी तबीयत सही है। एम्स ने कहा, 'लालू यादव को रांची के रिम्स से यहां रेफर किया गया था। उनकी तबीयत में काफी सुधार हुआ जिसके बाद उन्हें वापस रिम्स मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है।'

डिस्चार्ज होने से पहले लालू प्रसाद यादव ने एम्स को लिखे अपने पत्र में कहा था, 'मुझे बताया गया है कि अस्पताल से छुट्टी करने की कार्रवाई हो रही है। मुझे यहां अच्छे इलाज के लिए लाया गया था। मैं आपको बताना चाहता हूं कि मैं हृदयरोग, किडनी इंफेक्शन, शुगर एवं कई अन्य बीमारियों से ग्रसित हूं। कमर में दर्द है और बार-बार चक्कर आ रहा है, मैं कई बार बाथरूम में गिर भी गया हूं। मेरा रक्तचाप और शुगर भी बीच में बढ़ जाता है।'

लालू ने आगे लिखा, 'मैं आपको सूचित करना चाहता हूं कि रांची मेडिकल कॉलेज में समुचित इलाज की व्यवस्था नहीं है। हर नागरिक का यह संवैधानिक अधिकार है कि उसका समुचित इलाज उसकी संतुष्टि के अनुसार हो। न जाने किस एजेंसी और राजनीतिक दबाव में मुझे यहां से हटाने का निर्णय लिया जा रहा है।'

लालू यादव ने आगे निदेशक से डिस्चार्ज न करने की गुहार लगाई। लालू ने अपने लेटर में लिखा, 'जब तक मैं पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, तब तक मुझे यहीं रखकर मेरा इलाज किया जाए। अगर मुझे रांची मेडिकल अस्पताल भेजा जाता है और इससे मेरे जीवन पर कोई खतरा पैदा होता है तो इसकी जवाबदेही आप सब पर होगी।'