नीतीश से निपटने के लिए लालू ने बनाया प्लान B !

पटना (25 जुलाई): इन दिनों आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव और उनके परिवार के सितारे कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। एक तरफ जहां उनके परिवार वाले CBI, इनकम टैक्स और ED के निशाने पर हैं। वहीं नीतीश कुमार भ्रष्टाचार के मामले को लेकर अपने मंत्रिमंडल से लालू के छोटे बेटे और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के इस्तीफे पर अड़े हैं।

लालू और नीतीश के बीच दूरियां बढ़ती जा रही है। जेडीयू जहां तेजस्वी यादव के इस्तीफे को लेकर आरजेडी पर दवाब बना रहे हैं। वहीं लालू ने साफ कर दिया है कि तेजस्वी यादव के इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता है और बताया जा रहा है कि अगर नीतीश कुमार तेजस्वी यादव को अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त करते हैं तो उनके कोटे से सभी मंत्री इस्तीफा दे देंगे। 

इन सबके बीच खबर आ रही है कि नीतीश कुमार बीजेपी से समर्थन लेकर राज्य में अपनी सरकार को चलाते रहें। ऐसे में खबर आ रही है कि लालू प्रसाद यादव ने भी महागठबंधन टूटने पर अपनी भावी कार्ययोजना बना रखी है। नीतीश से अलग होने पर लालू यादव मायावती और जीतन राम मांझी का साथ ले सकते हैं।

बताया जा रहा है कि लालू यादव उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन मांझी के संग चुनाव गठजोड़ कर सकते हैं। हालांकि मायावती और मांझी का बिहार में बड़ा जनाधार नहीं है लेकिन दोनों ही दलित जाति के नेता हैं। मायावती की छवि देश के बड़े दलित नेता की है। हाल ही में जब मायावती ने राज्य सभा सदस्यता से इस्तीफा दिया तो लालू यादव ने उन्हें तुरंत ही राज्य सभा सीट का प्रस्ताव दे दिया। लालू के इस कदम से राजनीतिक जानकारों के इस कयास को बल मिला कि लालू मायावती को ध्यान में रखते हुए बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं मांझी बिहार में अच्छी आबादी वाली मूसहर जाति से आते हैं। 2015 में हुए बिहार विधान सभा चुनाव में मांझी बीजेपी के साझेदार थे लेकिन राजनीति में कोई दोस्ती या दुश्मनी स्थाई नहीं होती।

आरजेडी प्रमुख की एक अन्य रणनीति जदयू के अंदर फूट डालो और राज करो की भी हो सकती है। 243 सदस्यों वाली बिहार विधान सभा में आरजेडी के 80, कांग्रेस के 27, जेडीयू के 71 और बीजेपी के 53 विधायक हैं। बीजेपी के सहायक दलों के कुल पांच विधायक हैं। विधान सभा में बहुमत के लिए कुल 122 विधायकों का समर्थन चाहिए। अगर नीतीश बीजेपी के साथ जाते हैं तो कांग्रेस लालू के साथ हर हाल में रहेगी। ऐसे में लालू यादव को बहुमत के लिए केवल 15 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत होगी। खबरों के मुताबिक जेडीयू के करीब 20 विधायक और 12 में से 6 सांसद मौजूदा निजाम से खफा हैं। ऐसे में लालू यादव की कोशिश होगी कि वो जेडीयू के इन असंतुष्टों के जख्मों को कुरेंदे और बगावत की आग भड़काकर अपनी रोटी उस पर सेंक लें।