संसद की कार्यवाही स्थगित होने से आडवाणी दुखी, बोले- सोचता हूं दे दूं इस्तीफा

नई दिल्ली (15 दिसंबर): नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में संग्राम जारी है। 16 नवंबर से शुरू हुआ संसद का मौजूदा शीतकालीन सत्र के खत्म होने में अब महज एक दिन बचा है। लेकिन दोनों सदनों की कार्रवाही एक बी दिन ठीक से नहीं चल सकी है। सदन में पिछले एक महीने से जारी इस गतिरोध से बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी

दुखी नजर आ रहे हैं।

हंगामे की वजह से गुरुवार को एकबार फिर सदन की कार्यवाही कल तक यानी संसद के मौजूदा सत्र के आखिरी दिन के लिए स्थगित हो गई। इस पर आक्रोश जताते हुए लालकृष्ण आडवाणी ने अन्य दलों के सदस्यों के साथ बातचीत में कहा कि मेरा तो मन कर रहा है कि मैं इस्तीफा दे दूं। सदन में नोटबंदी के मुद्दे पर चर्चा जरूर होनी चाहिए। बिना किसी जीत हार के कल संसद में चर्चा जरूर करें और फिर शांति से सदन को स्थगित करें।

उन्होंने कहा कि सब को लगी है कि मैं जीतू , मैं जीतू। लेकिन यदि कल भी ऐसे ही हंगामे के बीच सदन स्थगित हो गया तो संसद हार जाएगी और हम सब की बहुत बदनामी होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर आज अटल जी भी ससंद में होते तो वह भी अपसेट हो जाते।

विमुद्रीकरण के मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के सदस्यों के भारी हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही करीब सवा 12 बजे स्थगित होने के बाद भी आडवाणी सदन में करीब 20 मिनट तक गंभीर चिंतन की मुद्रा में बैठे रहे।

सदन स्थगित होने पर तृणमूल कांग्रेस के इदरिस अली उनकी सीट पर गए और उन्हें प्रणाम किया। इस बीच विपक्ष के कुछ ओर सदस्य भी आडवाणी की सीट के पास आ गए। पत्रकार गैलरी में मौजूद पत्रकारों ने इदरिस अली के साथ बातचीत में आडवाणी को यह कहते हुए सुना कि उन्होंने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से कहा था कि मेरा नाम लेकर लोकसभा अध्यक्ष से कहिए कि सत्ता पक्ष और कांग्रेस की ओर से किसी एक नेता को आज बुला लें और यह तय कर लें कि कल सदन चले।