एक झील ऐसी जहां सैकड़ों साल से तैर रहे हैं रहस्यमयी कंकाल

नई दिल्ली (1 अगस्त): उत्तराखण्ड की रूपकुण्ड की झील तमाम रहस्यों को अपनी गहराई में समोय बैठी है।  ये झील सुंदर तो है लेकिन साथ ही भुतहा भी है। इस झील में आपको सिर्फ कंकाल ही कंकाल देखने को मिलते हैं। लगभग नौ सौ साल पहले यहां इतनी ओला वृष्टि हुई कि यहां रहने वाले सभी लोग मारे गये। कंकालो की डीएनए जांच से ये बात साबित हुई है कि ये हड्डियां लगभग नौ सौ साल पहले की हैं।

हर साल जब बर्फ पिघलती है तो यहां सैकड़ों कंकाल झील के पानी में तैरते दिखाई देते हैं।इतने सारे नरकंकालों के यहां होने की वजह से ही इस झील का नाम कंकाल झील रख दिया गया है। यहां सबसे पहले नरकंकालों की खोज 1942 में रेंजर एच के माधवल ने की थी। स्थानीय लोग इस झील में नरकंकालों के मिलने की वजह नंदा देवी का प्रकोप मानते हैं। और तो और वो इस झील की पूजा भी करते हैं। यहां नरकंकाल हर उम्र और आकार के हैं। कुछ नरकंकालों की लंबाई तो 10 फीट से भी ज्यादा है।