सोनम वांगचुक का नयाब 'आइस पिरामिड', लद्धाख के लिए साबित हो रहा है वरदान

लद्दाख (26 नवंबर): फिल्म 3 इडियट्स में आमिर खान का किरदार फुंसुक वांगडू काफी मशहूर हुआ था। आमिर खान का ये किरदार असल जिंदगी के फुंसुक यानी सोनम वांगचुक से प्रेरित था। लद्दाख में रहने वाले सोनम वांगचुक अपने नए प्रयोग से दुनिया भर में मशहूर हैं। इसी कड़ी में सोनम ने लद्दाख में पानी की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए 'आइस पिरामिड' बनाया है जिससे यहां लंबे समय के लिए पानी स्टोर किया जा सके।

फ्यूचर इंस्टीट्यूट की तरफ से आयोजित फ्यूचर टॉक इवेंट में वांगचुक ने बताया कि वह किस मकसद से और कैसे लोगों के हित में काम करते हैं या उसकी प्लानिंग करते हैं। वह पद्मश्री और रिटायर्ड सिविल इंजिनियर शेवांग नॉर्फेल से प्रेरित हैं, जिन्होंने लद्दाख के बाशिंदों की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए कृत्रिम ग्लैशियर तैयार करने के आ​इडिया हकीकत में तब्दील कर दिखाया था।

हालांकि, सोनम से इससे एक कदम आगे निकलकर नया विकल्प निकाला है। उन्होंने 'आइस पिरामिड प्रॉजेक्ट' के तहत एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिससे कि स्थानीय लोगों की पानी की जरूरत को पूरा किया जा सके। पानी की किल्लत से जूझते क्षेत्र में यह आइडिया किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो रहा है। उन्होंने वर्टिकल आइस पिरामिड बनाए ताकि इनमें पानी को लंबे वक्त के लिए स्टोर किया जा ​सके। यह हर एक पिरामिड औसतन 35 से 40 मीटर ऊंचा है और इसमें एक वक्त पर तकरीबन 16 हजार क्यूबिक लीटर पानी स्टोर किया जा सकता है। इतने पानी से 10 ​हेक्टेयर जमीन को सींचा जा सकता है।

सोनम वांगचुक  ऐसे लगभग 100 पिरामिड लद्दाख में तैयार किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस सिस्टम में ऐसा विकल्प भी तैयार किया है जिससे कि ग्लैशियर धूप में तेजी से नहीं पिघलता है। सोनम वांगचुक के इस नेक प्रयास से न सिर्फ स्थानीय लोगों को सिंचाई में मदद मिली बल्कि साथ ही वहां 500 से अधिक नए पेड़ भी लगाए जा चुके हैं।

वह पानी की कमी से जूझते लेह के युवा और किसान की हरसंभव मदद करने की ​कोशिश करते हैं। लद्दाख में बीते 20 वर्षों से शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे सोनम वांगचुक को हाल ही में प्रतिष्ठित पुरस्कार 'रोलेक्स अवॉर्ड' से नवाजा गया। मूल रूप से इंजिनियर सोनम को यह पुरस्कार लोगों के जीवन स्तर को बेहतर करने और विश्व संस्कृति को बचाने के लिए दिया गया है। इस अवॉर्ड को हासिल करने के बाद सोनम ने कहा कि,'यह अवॉर्ड मेरे लिए नहीं, भारत के लिए है।'

आपको बता दें कि लद्दाख उत्तरी पहाड़ों की बेल्ट में बसा एरिया है जहां 2,500 से 4,000 फीट तक की ऊंचाई पर गांव बसे हैं। यहां के लोगों के लिए पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या है। इसके साथ ही पिघलते हिमालयन ग्लैशियर भी यहां की आबादी के लिए खतरा है। सर्दियों में तो यहां का पारा कई बार माइनस 30 डिग्री तक जा पहुंचता है।