कुंभ 2019: पेशवाई जुलूस से लेकर शाही स्नान तक जानिए हर अहम तारीख

न्यूज 24 ब्यूरो, उत्कर्ष अवस्थी,नई दिल्ली (25 दिसंबर): हिंदू आस्था के सबसे बड़े पर्व 'कुंभ' का आयोजन प्रयागराज में 15 जनवरी, 2019 से 4 मार्च, 2019 तक होगा। कुंभ के दौरान होने वाले शाही स्नान का बहुत महत्व है। आस्था के इस महाकुंभ में देश-दुनिया के कोने-कोने से पर्यटक पवित्र संगम में डुबकी लगाने पहुंचते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार मान्‍यता है कि किसी भी कुंभ मेले में पवित्र नदी में स्‍नान या तीन डुबकी लगाने से सभी पुराने पाप धुल जाते हैं और मनुष्‍य को जन्म-पुनर्जन्म तथा मृत्यु-मोक्ष की प्राप्‍ति होती है।

कुंभ में सभी अखाड़े पूरी ताकत के साथ शाही अंदाज, हाथी-घोड़े, ऊंट और बैंड-बाजों के साथ शहर के प्रमुख हिस्सों में घूमते हुए मेले में एंट्री करते हैं। कई अखाड़ों का जुलुस का एक-एक किलोमीटर लंबा होता है। ये एक तरह से अखाड़ों का वैभव प्रदर्शन होता है। कुंभ का ये सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण होता है। इस बार प्रयाग के कुंभ में पहली बार साधु-संतों के साथ किन्नर अखाड़ा भी अपना शिविर लगाएगा, जिसमें देश के साथ ही विदेशों से भी बड़ी संख्या में किन्नर जुटेंगे।

उज्जैन में हुए सिंहस्थ कुंभ में स्थापित हुए किन्नर अखाड़े ने भूमि पूजन के बाद अब पेशवाई निकालने की तैयारी शुरु कर दी है। किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के मुताबिक 6 जनवरी को किन्नर अखाड़ा देवत्व यात्रा के साथ कुंभ मेला क्षेत्र में बनाये गए अपने शिविर में प्रवेश करेगा। इसके साथ ही किन्नर अखाड़े के संत स्नान पर्वों पर अमृत स्नान भी करेंगे। उन्होंने किन्नर अखाड़े की पेशवाई और अन्य कार्यक्रमों में लोगों को भी आमन्त्रित किया है।

साधु-संतों के इन तमाम अखाड़ों की पेशवाई और शाही स्नान के लिए प्रमुख तारीख:-श्री पंचायती अखाड़ा, निरंजनी- 2 जनवरी

-श्री पंचायती अखाड़ा, बड़ा उदासीन- 11 जनवरी

-श्री पंचायती अखाड़ा, निर्मला- 13 जनवरी

-श्री पंचायती अखाड़ा, महानिर्वाणी- 1 जनवरी

-श्री तपोनिधि आनन्द अखाड़ा- 3 जनवरी

-श्री पंचायती अखाड़ा, नया उदासीन- 10 जनवरी

-श्री शम्भू पंच अटल अखाड़ा- 3 जनवरी

-श्री पंच अग्नि अखाड़ा- 25 दिसम्बर

-श्री पंच दशनाम आह्वान अखाड़ा- 27 दिसंबर

-श्री पंच दसनाम जूना अखाड़ा- 25 दिसंबरशाही स्नान की तारीख:

इस बार कुंभ में तीन शाही स्नान है। शाही स्नान में अखाड़े जुलूस की शक्ल में स्नान के लिए जाते हैं। अखाड़ों के लिए खास तौर पर घाट तैयार किया जाता है, जहां सिर्फ अखाड़ों के साधु ही स्नान करते हैं। 15 जनवरी से कुंभ की शुरुआत हो रही है और पहला शाही स्नान भी 15 जनवरी को है. इसके बाद 4 फरवरी दूसरा और 10 फरवरी को तीसरा शाही स्नान है।कुंभ में मौनी अमावस्या (4 फरवरी) सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय सभी अखाड़े, साधु और कल्पवासी मौजूद रहेंगे। ऐसा माना जाता है कि शाही स्नान करने वाले व्यक्ति के सभी पापों का नाश हो जाता है।

अन्य महत्वपूर्ण स्नान:

पर्व स्नान- 21 जनवरी , सोमवार, पौष पूर्णिमापर्व स्नान- 31 जनवरी, गुरुवार, पट्लिका एकादशीपर्व स्नान- 16 फरवरी, शनिवार, जया एकादशी

प्रयागराज में कुंभ:

गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों के संगम स्थल पर हर 12 वर्ष के अंतराल पर महाकुंभ और हर 6 वर्ष पर अर्धकुम्भ मेले का आयोजन होता है। कुंभ मेले को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है।  हर तीन सालों के अंतराल में प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन है। इनमें सबसे वृहद कुंभ का आयोजन प्रयाग में संगम के तट पर होता है।