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#KumbhManthan: हमें सभी द्वंदों से मुक्त कर देता है कुंभ- मोरारी बापू

मोरारी बापू ने कहा कि कुंभ की महिमा वैदकाल से रही है। मैं इतना ही कहूंगा कि जहां पर यह होता है, वहां पर वनवास के दौरान भगवान राम ने स्नान किया था। उसकी कुंभ मेले में गोस्वामी जी ने अपने राम चरित मानस में कुंभ का जिक्र किया है

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (10 जनवरी): संगम नगरी में प्रयागराज में 15 जनवरी से कुंभ आयोजित होने जा रहा है। इस आयोजन से पहले आपका पसंदीदा चैनल न्यूज 24 ने दिल्ली के अंबेडक्टर सेंटर में आज कुंभ मंथन का आयोजन कर रहा है। इस कुंभ मंथन देश के बड़े धर्मगुरु, संत और योगाचार्य समेत तमाम सियासी दलों के नेता शामिल हो रहे हैं। न्यूज 24 के इस खास कार्यक्रम कुंभ मंथन में प्रसिद्ध रामकथा वाचक मोरारी बापू भी शामिल हुए और तमाम मुद्दों पर न्यूज 24 एडिटर इन चीफ अनुराधा प्रसाद के सवालों का खुलकर जवाब दिया।

इस मौके पर मोरारी बापू ने कहा कि कुंभ की महिमा वैदकाल से रही है। मैं इतना ही कहूंगा कि जहां पर यह होता है, वहां पर वनवास के दौरान भगवान राम ने स्नान किया था। उसकी कुंभ मेले में गोस्वामी जी ने अपने राम चरित मानस में कुंभ का जिक्र किया है। उन्होने कहा कि कुंभ में दो धाराएं एक साथ बहती हैं। भले ही जल के रूप में सरस्वती प्रकट ना हों, लेकिन वाणी के रूप में वहां प्रकट हो जाती है।  कुंभ में धर्म और विज्ञान का समन्वय प्राचीन काल से चला आ रहा है। इस बार भी मैं 19 तारीख से राम कथा के लिए कुंभ में जाऊंगा और कथा करूंगा। उन्होंने कहा कि कुंभ हमें सीखाता है कि हमारा विश्व बाहर से स्वच्छ रहे और भीतर से पवित्र रहे। कुंभ का पवित्रत इतना है कि हमें सभी द्वंदों से मुक्त कर देता है। पूरा विश्व राम मय है। मैंने तो गुरु कृपा से उसे विशेष रूप में प्रकट करने की कोशिश की है। बीच के कुछ काल में अगर यह खंडित हुई है तो उसमें समय भी लग लगता है।

कुंभ के महिमा का बखान करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि जबतक हमारे देश में कुंभ है और रहेगा, भारत का भविष्‍य बहुत उज्जवल है। उन्होंने कहा कि जब सेतू बंधन हुआ, तब बड़ी-बड़ी चट्टानें समुद्र में डाली जाती थी। वह तैरती थी, लेकिन जुड़ती नहीं थी। वह तभी जुड़ी जब उनपर राम लिखा गया। जब भगवान राम का नाम सच्ची श्रद्धा से लिया जाए तो जो बिखर रहे हैं, वह खुद इकट्ठे हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारे वेद और ऋषि-मुनियों ने कहा है कि हमें जहां-जहां से अच्छे विचार मिले उसे ग्रहण करना चाहिए। जो बात शुभ है, वह समरस्ता लाएगी ही। मैं किसी को सुधारने की कोशिश में नहीं हूं, मैं सबका स्वीकार करने की कोशिश में हूं और वहीं सुधार जाएगा। साधु-संतों के विचार कभी छोटे नहीं पड़ेंगे। कथा अपना परिणाम लाएगी, कब लाएगी ये मुझे पता नहीं । लगे हाथों उन्होंने कहा कि राजनीति में धर्म होना चाहिए। धर्म से मेरा मतलब है, सत्य, प्रेम और करूणा । लेकिन धर्म में राजनीति कभी नहीं होनी चाहिए। संविधान में देशकाल के अनुसार परिवर्तन होता है और करना पड़ता है। लेकिन सत्य, प्रेम और करूणा में वह कभी नहीं बदल सकता, वह सबसे ऊपर है। संविधान में जब जो देश के लिए जरूरी है उसमें बदलाव कर सकते हैं। मेरे देश का एक युवा संन्यासी कहता है कि मुझे जाति-भेद नहीं है। भगवान हनुमान की जाति के बारे में जाना नहीं चाहिए, लेकिन वह वायु पुत्र हैं। वह संकट करने वाला है और इस बारे में कोई चर्चा करके हमें कोई संकट नहीं खड़ा करना चाहिए। वायु की कोई जाति नहीं होती।

मोरारी बापू  की बड़ी बातें...

- कुंभ की महिमा वैदकाल से रही है। मैं इतना ही कहूंगा कि जहां पर यह होता है, वहां पर वनवास के दौरान भगवान राम ने स्नान किया था

- कुंभ में दो धाराएं एक साथ बहती हैं। भले ही जल के रूप में सरस्वती प्रकट ना हों, लेकिन वाणी के रूप में वहां प्रकट हो जाती है

- कुंभ हमें सीखाता है कि हमारा विश्व बाहर से स्वच्छ रहे और भीतर से पवित्र रहे

- पूरा विश्व राम मय है। मैंने तो गुरु कृपा से उसे विशेष रूप में प्रकट करने की कोशिश की है

- जबतक हमारे देश में कुंभ है और रहेगा, भारत का भविष्‍य बहुत उज्जवल है

- साधु-संतों के विचार कभी छोटे नहीं पड़ेंगे। कथा अपना परिणाम लाएगी, कब लाएगी ये मुझे पता नहीं

- धर्म से मेरा मतलब है, सत्य, प्रेम और करूणा । लेकिन धर्म में राजनीति कभी नहीं होनी चाहिए

- संविधान में देशकाल के अनुसार परिवर्तन होता है और करना पड़ता है। लेकिन सत्य, प्रेम और करूणा में वह कभी नहीं बदल सकता, वह सबसे ऊपर है

- संविधान में जब जो देश के लिए जरूरी है उसमें बदलाव कर सकते हैं।

न्यूज 24 के खास कार्यक्रम कुंभ मंथन में  मोरारी बापू ने और क्या कुछ कहा, जानने के लिए देखिए ये वीडियो....

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