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'लेडी नागा' साधुओं से जुडे़ ये हैं अद्भूत रहस्य!

बेशक उनका रुप स्त्री का है, लेकिन वो 16 श्रृंगार नहीं करतीं बल्कि वो करती हैं श्मशान में शव साधना। कहने को तो वो महिलाएं हैं, लेकिन वो सौंदर्य की उपासक नहीं है बल्कि वो कहलाती हैं महाकाल की

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न्यूज 24 ब्यूरो, वरुण सिन्हा/पंकज चौधरी, प्रयागराज (17 जनवरी): बेशक उनका रुप स्त्री का है, लेकिन वो 16 श्रृंगार नहीं करतीं बल्कि वो करती हैं श्मशान में शव साधना। कहने को तो वो महिलाएं हैं, लेकिन वो सौंदर्य की उपासक नहीं है बल्कि वो कहलाती हैं महाकाल की सबसे बड़ी भक्त। उन्हें जीवन का ऐश्वर्य नहीं बल्कि अघोरी का कठिन तप आकर्षित करता है। नागाओं की रहस्यमयी दुनिया की वो खुद सबसे बड़ी रहस्य हैं। नागा साधुओं का संसार यदि अद्भुत है तो महिला नागा साध्वियों की दुनिया अकल्पनीय। अगर नागा साधुओं की जिंदगी रहस्यों से भरी है तो लेडी नागा का जीवन अजूबों का ऐसा पिटारा है, जिसके भीतर झांकने की हिम्मत शायद ही कोई करता है।

साधना में लीन रहने वाली महिला नागा साध्वी अपनी जिंदगी का ज्यादातर वक्त गुफाओं और कंदराओं में गुजारती हैं। इन्हें एकांत में रहना पसंद है, इसलिए ज्यादातर मौके पर ये समाज के सामने आने से परहेज करती हैं। प्रयागराज के कुंभ में नागा साध्वियों की कई टोली पहुंची है, लेकिन इन तक पहुंचने की हिम्मत किसी में नहीं। बहुत मान-मनौव्वल के बाद कुछ साध्वी बात करने के लिए तैयार हुई और उसके बाद रहस्यों की दुनिया के कई दरवाजे एक के बाद एक हमारे सामने खुलते चले गए।

महिलाओं का नागा साधु बनना कितना मुश्किल है

- सन्यासिन बनने से पहले महिला को 6 से 12 साल तक कठिन ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है

- सन्यासिन बनाने से पहले अखाड़े के साधु-संत महिला के घर परिवार और पिछले जीवन की जांच-पड़ताल करते हैं

- महिला को भी नागा सन्यासिन बनने से पहले स्वंय का पिंडदान और तर्पण करना पड़ता है

- जिस अखाड़े से महिला सन्यास की दीक्षा लेना चाहती है, उसके आचार्य महामंडलेश्वर ही उसे दीक्षा देते हैं

- महिला को नागा सन्यासिन बनाने से पहले उसका मुंडन किया जाता है और नदी में स्नान करवाते हैं

- नागा साधु की पदवी मिलने के बाद अखाड़े की तरफ से उन्हें एक विशेष पहचान दी जाती है

महिला नागा बनना जितना मुश्किल है, उससे ज्यादा कठिन है उनकी साधना। साध्वियों को एक खास दिनचर्या का पालन करना पड़ता है...

- इन्हें सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना होता है

- जिसके बाद भगवान शिव का जप होता है

- महाकाल ये जाप शाम तक चलता है

- देर शाम को दत्तात्रेय भगवान की पूजा होती है

- इसके बाद साध्वी शयन साधना में जुट जाती हैं

- कुंभ में नागा साधुओं के साथ महिला साध्वी भी स्नान करती हैं

- महिला साध्वियों को नग्न स्नान की अनुमति नहीं होती

- नागा साध्वी को अघोरी का वेश रखने की अनुमति है

- नागा साधु की तरह साध्वी भी शव साधना करती हैं

भगवान की साधना के साथ नागा साध्वी शस्त्र की आराधाना भी करती हैं। सभी साध्वी तलवार और त्रिशुल चलाने में निपुण होती हैं। समय-समय पर अस्त्रों और शस्त्रों की विधिवत उपासना भी की जाती है। नागा साध्वियों की ये दुनिया अपने आप में रहस्य के कई चादरों में लिपटी है। जैसे-जैसे ये दरवाजे आपके सामने खुलते हैं, वैसे-वैसे आप आस्था के कई अचंभित करने वाली सच्चाईयों से रु-ब-रु होते हैं।

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