कुलभूषण जाधव की मौत की सजा पर भारत का विरोध, पाक उच्चायुक्त को किया तलब

नई दिल्ली (10 अप्रैल): पड़ोसी पाकिस्तान अपनी करतूतों को लेकर एकबार फिर बेनकाब हुआ है। पाकिस्तान ने भारतीय नेवी के पूर्व अफसर कुलभूषण को फांसी की सज़ा सुना दी है। पिछले मार्च में पाकिस्तान ने बलूचिस्तान से कुलभूषण को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया था। भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज किया था। कुलभूषण के खिलाफ पाकिस्तान के पास कोई सबूत नहीं था और ना ही पाकिस्तान के कोर्ट में सुनवाई हुई और ना ही कुलभूषण को काउंसलर दिया गया और बिना किसी सबूत के पाकिस्तान ने भारतीय नेवी अफसर का कोर्ट माशिल कर दिया।


भारत ने कुलभूषण जाधव को रॉ एजेंट बताकर मौत की सजा सुनाने पर पाकिस्तान से कड़ा विरोध जताया है। भारत ने विरोध में कहा है कि यदि एक भारतीय नागरिक के खिलाफ यह सजा कानून और न्याय के मूल मानदंडों को देखे बिना दी जाती है, तो भारत सरकार और यहां के लोग इसे पूर्व नियोजित हत्या का मामला मानेंगे।


विदेश सचिव एस जयशंकर ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब कर उन्हें अपना विरोध पत्र सौंपा। भारत ने अपने विरोध पत्र में कहा कि हमने एक भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के बारे में सोमवार को पाक सेना की मीडिया शाखा यानी ISPR की प्रेस विज्ञप्ति देखी। पिछले साल ईरान से जाधव का अपहरण कर लिया गया था और पाकिस्तान में उसके बाद की मौजूदगी पर कभी भी विश्वसनीय जानकारी नहीं दी गई। भारत सरकार ने इस्लामाबाद में अपने उच्चायोग के माध्यम से बार-बार उन तक कौंसुलर पहुंच देने की मांग की। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक इस आशय के अनुरोध औपचारिक रूप से 25 मार्च 2016 और 31 मार्च 2017 के बीच 13 बार किए गए थे। पाकिस्तान अधिकारियों ने इसकी अनुमति नहीं दी थी।


विरोध पत्र में कहा गया कि जाधव के खिलाफ सजा का कारण बनने वाली कार्यवाही उनके खिलाफ किसी भी विश्वसनीय सबूत के अभाव में उपहास है। यह महत्वपूर्ण है कि हमारे उच्चायोग को यह भी सूचित नहीं किया गया था कि जाधव को मुकदमे में ले जाया जा रहा था। बड़ी पाकिस्तानी हस्तियों ने खुद सबूत की पर्याप्तता के बारे में संदेह किया है। आईएसपीआर की प्रेस रिलीज में दावा है कि जाधव को तथाकथित मुकदमे के दौरान एक बचाव अधिकारी दिया गया था, लेकिन इन हालात में यह साफ तौर से बकवास है।