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ICJ में हार के बाद नवाज और पाक सेना में छिड़ी जंग, 'तख्तापलट' के आसार

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (19 मई): कुलभूषण जाधव के मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में मिली करारी शिकस्त के बाद पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति में जबरदस्त उठापटक शुरू हो चुकी है। नवाज सरकार और पाकिस्तानी सेना सीधे तौर पर आमने-सामने दिखाई दे रही है। तनाव इस कदर बढ़ गया है कि नवाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल बाजवा ने ICJ के फैसले के बाद फोन पर बात तक नहीं की है। दूसरी तरफ जनरल बाजवा ने एक कार्यक्रम में नवाज शरीफ पर निशाना साधते हुए कहा कि इस समय पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोराहे पर खड़ा है, जिसमें सेना को देश के सहयोग की जरूरत है। जनरल बाजवा का वक्तव्य साफ दर्शाता है कि नवाज सरकार से सेना को कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि पाक सेना और नवाज शरीफ के बीच जंग जनरल राहिल शरीफ के कार्यकाल से ही चल रही है समय-समय पर दोनों के बीच अनबन की खबरें आती रही हैं।

कुलभूषण जाधव के मामले में पाक सेना और सरकार आमने सामने- कुलभूषण जाधव के मामले में ICJ में भारत से मिली के बाद पाकिस्तान की मीडिया और विपक्ष नवाज सरकार की आलोचना कर रहा है। उनका कहना है कि पाकिस्तान की लीगल टीम ने ICJ में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रखा। 90 मिनट मिले समय का पूरा इस्तेमाल भी नहीं किया गया सिर्फ 30 मिनट में ही सारी दलीलें दे दी गयीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में उपजे इस गुस्से से निपटने के लिए नवाज सरकार ICJ में जिरह करने के लिए नए वकीलों की टीम तैयार कर रही है। उधर पाकिस्तानी सेना चाहती थी कि सैन्य कोर्ट द्वारा दी गई फांसी की सजा पर नवाज सरकार तुरंत कार्रवाही करे लेकिन उससे पहले ही भारत मामले को ICJ में ले गया। इन्हीं बातों को लेकर पाक सेना शरीफ सरकार से खुश नहीं है। खबरों को मुताबिक शरीफ के कैबिनेट के किसी वरिष्ठ सदस्य ने जाधव को लेकर कोई तल्ख टिप्पणी नहीं की है। इससे भी पाक सेना नाराज है। साथ ही 27 अप्रैल को भारतीय इस्पात कारोबारी सज्जन जिंदल और शरीफ की मुलाकात पर्दे के पीछे की कूटनीति का हिस्सा बताई गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शरीफ ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को जिंदल के साथ मुलाकात को लेकर भरोसे में भी नहीं लिया था।

जाधव को लेकर पाक सेना और सरकार के अलग-अलग बयान- कुलभूषण जाधव के मामले में भी नवाज सरकार पर पाक सेना का ज्यादा दवाब रहा है। जाधव पर जासूसी की बात को लेकर पाकिस्तान सरकार और सेना में एक राय नहीं थी। जाधव की गिरफ्तारी के बाद पाक सरकार के दो विरोधाभासी बयान आए थे। पहला बयान नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज का था। ये बयान सरताज अजीज द्वारा 7 दिसंबर 2016 को पाक संसद में दिया गया था। जिसमें अजीज ने कहा था कि पाक एजेंसियों के तैयार डोजियर में कुछ भी नहीं है। जाधव ने सिर्फ बयान दिया है उसके खिलाफ हमारे पास कोई पुख्ता सुबूत नहीं हैं। अजीज के बयान के थोड़ी देर बाद पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का बयान आया। पाक विदेश मंत्रालय ने कहा अजीज का बयान बेबुनियाद और तथ्यों से परे है। पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कुलभूषण जाधव के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। कहा जा रहा है कि सेना के दवाब के बाद नवाज सरकार ने अपना रूख बदला।

सेना और शरीफ कब-कब आए आमने-समाने-

मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही नवाज शरीफ और पाक सेना में जबरदस्त टकराहट चल रही है। भारत के पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल ऑपरेशन के बाद यह झगड़ा चरम पर पहुंच गया है। वर्तमान समय में डॉन लिक्स मामले में नवाज सरकार और सेना के तल्खी खुलकर सामने आ गई है। मतभेद तीन दिन पहले उस वक्त पैदा हुए जब प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के उच्चस्तरीय बैठक की सूचना लीक करने के मामले में अपने विश्वसनीय सहयोगी तारिक फातमी को बर्खास्त कर दिया लेकिन सेना की आपत्ति के कुछ ही देर बाद फैसले को यह कहते खारिज कर दिया कि उनकी कार्रवाई अधूरी है। सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने ट्विटर के जरिए सेना का असंतोष जाहिर किया। प्रवक्ता ने कहा कि डॉन में प्रकाशित खबर पर कार्रवाई अपर्याप्त है। इसके कुछ ही मिनट बाद गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान ने सेना की इस प्रतिक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि ट्विटर पर प्रतिक्रियाएं देश के लिए घातक है। कई अहम मसले हैं और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनसे ट्वीट के जरिए निपटा जा रहा है।

डॉन लिक्स मामला- 6 अक्टुबर को पाकिस्तान अखबार डॉन में छपी खबर के मुताबिक सेना और शरीफ आमने-समाने आ गए थे। दरअसल पिछले साल 3 अक्टूबर को नवाज ने आर्मी के टॉप अफसरों के साथ एक मीटिंग की थी। इसमें तब के आर्मी चीफ राहिल शरीफ भी मौजूद थे। नवाज के कुछ मिनिस्टर भी मीटिंग में शामिल हुए थे। इस खबर को डॉन के पत्रकार सिरिल अलमीडा ने लिखा था। पत्रकार सिरिल अलमेडा की खबर के मुताबिक नवाज शरीफ ने जनरल शरीफ तो सबसे सामने सुनाया। नवाज शरीफ ने पाक सेना से साफ कहा कि जो हालात बनें उनमें पाकिस्तान दुनिया में अलग थलग पड़ा है।

सरकार और ISI में हुई तू तू मैं मैं- एजाज चौधरी के प्रेंजेटेशन के बाद ISI चीफ जनरल रिजवान और शाहबाज शरीफ में हुई बहस। तू-तू, मैं-मैं तक की नौबत तक आ गई थी। ISI चीफ जनरल रिजवान ने जब कहा कि सरकार आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इस पर पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ उबल पड़े, उन्होंने ISI चीफ पर ही ठीकरा फोड़ दिया। ISI चीफ को हटाने की खबरें पाकिस्तानी मीडिया की सुर्खियां बनी रहीं। बाद में जनरल राहिल शरीफ के सेना प्रमुख पद से छुट्टी की खबरें आईं, कहा गया कि नवाज सरकार ने राहिल शरीफ के सेना प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाने से मना कर दिया था।

बाजवा और नवाज के रिश्तों में तल्खी- जनरल कमर जावेद बाजवा के हाथ कमान आने के बाद भी सेना और सरकार में रिश्ते नहीं सुधरे हैं। तालिबान को लेकर कई बार कमर जावेद बाजवा और नवाज शरीफ आमने-सामने आ चुके हैं। बाजवा तालिबान को लेकर नवाज सरकार की नीतियों से सहमत नहीं रहे हैं। तालिबानी आतंकियों को लिए बनी सीक्रेट कोर्ट को लेकर सेना और सरकार कई बार भीड़ चुके हैं। यही नही आतंकी हाफिज सईद पर नवाज सरकार द्वारा की जा रही कार्यवाही से भी सेना खुश नहीं है।

पनामागेट स्कैम में नवाज की जांच सेना के हाथ- पनामागेट स्कैम में फंसे शरीफ पर पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने ज्वॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम (JIT) बिठा दी है। बेशक ऊपर से देखकर लग रहा होगा कि इस फैसले से नवाज शरीफ की कुर्सी बच गई, लेकिन हकीकत में कोर्ट ने नवाज को ऐसा घेरा है कि अब शरीफ का इस चक्रव्यूह से निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ की जांच पाक सेना को सौंप दी है। रेडियो पाकिस्तान की खबर के मुताबिक ज्वॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के लोग शामिल किए गए हैं।


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