जन्माष्टमी 2019: यहां जानें जन्माष्टमी पूजा की सामग्री और विधि

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (24 अगस्त): देशभर में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के हर हिस्से में कृष्ण जन्माष्टमी धूम धाम से मनाई जा रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों में भगवान कृष्ण की झांकियां सजाई जा रही हैं। साथ ही इस अवसर पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।

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पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की सूची...

एक खीरा, दही, शहद, दूधएक चौकी, पीला साफ कपड़ा, पंचामृतबाल कृष्ण की मूर्ति, एक सांहासन, गंगाजलदीपक, घी, बातीधूपबत्ती, गोकुलाष्ट चंदन,  अक्षतमाखन, मिश्री, भोग सामग्रीतुलसी का पत्ता

कान्हा के श्रृंगार के लिए...

पीले वस्त्र और मोरपंखवैजयंती माला और चूड़ियांबांसुरी और मुकुटइत्र और बांसुरी

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पूजन विधि...

बेशक जन्माष्टमी का पूजन मध्य रात्रि को होता है परंतु इसकी तैयारी प्रात:काल से ही प्रारंभ हो जाती है। इसके लिए सुबह स्नान आदि से निवृत हो कर भगवान को प्रणाम करके व्रत का संकल्प लें। इसके बाद केले के खंभे,आम और अशोक की पत्तियों से मंडप तैयार करके उसमें पालना सजायें। 

घर के मुख्यद्वार पर मंगल कलश एवं मूसल स्थापित करें। इसके बाद मध्य रात्र होते ही शंख और घंटे की ध्वनि के बीच गर्भ के प्रतीक नार वाले खीरे से भगवान का जन्म कराएं। तत्पश्चात पंचोपचार पूजन करें। इसके लिए सर्वप्रथम बाल कृष्ण जिन्हें बाल मुकुंद भी कहते हैं, की मूर्ति को एक पात्र में रख कर दुग्ध, दही, शहद, पंचमेवा आैर सुंगध युक्त शुद्घ जल और गंगा जल से स्नान करायें, फिर उन्हें पालने में स्थापित करें, और  वस्त्र धारण करायें। 

इस अवसर पर भगवान को पीले वस्त्र पहनाना अति उत्तम माना जाता है। इसके बाद भगवान की विधि विधान से आरती करें। अंत में उन्हें नैवैद्य अर्पित करें। नैवैद्य में फल आैर मिष्ठान के साथ अपनी परंपरा के अनुसार धनिया, आटे, चावल या पंच मेवा की पंजीरी भोग लगाने के लिए शामिल करें। भगवान को इत्र अवश्य लगायें।