...तो इसलिए श्रीकृष्ण को प्रिय थे अर्जुन

 krishna arjun

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 अगस्त): यदि महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण और अर्जुन शामिल न होते तो महाभारत का युद्ध कुछ और ही तरीके से बयां किया जाता। लेकिन सोचने वाली बात है कि महाभारत युद्ध में कई योद्धा युद्ध के मैदान में जाने वाले थे। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के सारथी क्यों बने? वह अमूमन अर्जुन का ही साथ क्यों देते थे?

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धैर्य- कहते हैं जिस मनुष्य में धैर्य होता है, वह अपने आप ही महान बन जाता है। और अर्जुन बुद्धिमान, ताकतवर होने के साथ धैर्यवान थे।

विवेक- कोई भी काम हो उसे करने का एक सही समय होता है। अर्जुन इस बात का हमेशा ध्यान रखते थे। उनकी यह विवेकशीलता श्री कृष्ण को पसंद थी।

पराक्रम-  महाभारत के सभी पात्रों में से केवल अर्जुन ही एकमात्र ऐसे योद्धा थे, जो कि किसी भी चुनौती या परेशानी का सामना करने में समर्थ थे।

बल- अर्जुन में शारीरिक बल के साथ-साथ मानसिक बल भी था। इसीलिए वह चतुराई से मुश्किलों को दूर करने की क्षमता रखते थे।

Janmashtami

आपको बता दे कि जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच यह दुविधा है कि वह 23 तारीख को व्रत रखें या फिर 24 अगस्त को। दरअसल भाद्रपद के कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इसी मुहूर्त में कान्हा का जन्मदिवस मनाया जाता है। लेकिन हर साल अष्टमी दो दिन होती है। जैसे इस बार अष्टमी तिथि 23 अगस्त की रात्रि को शुरू होकर 24 तारीख को समाप्त हो रही है। यानी जन्माष्टमी में इस बार 23 और 24 अगस्त को दो दिन मनाई जाएगी। जन्माष्टमी का पर्व हिन्दु पंचाग के अनुसार, भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस बार यह अष्टमी 23 और 24 तारीख दो दिन है। विशेष उपासक 23 को जन्माष्टमी मनाएंगे जबिक आम लोग 24 अगस्त को जन्माष्टमी मना सकते हैं। क्योंकि उदया तिथि अष्टमी की बात करें तो यह 24 अगस्त को है। हालांकि भगवान कृष्ण के जन्म के वक्त आधी रात को अष्टमी तिथि को देखें तो 23 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

(Image Credit: Google)