अब कोटा के कोचिंग सेंटर्स पर लगाम लगाएगी सरकार!

नई दिल्ली (11 अप्रैल): राजस्थान के कोचिंग हब कहे जाने वाले कोटा में पढ़ाई के बोझ और तनाव से हार मानकर हर महीने औसतन एक स्टूडेंट खुदकुशी करता है। ऐसा पुलिस रिकॉर्ड से पता चलता है। ऐसे में नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) ने कोटा का दौरा किया है। साथ ही छात्रों के तनाव को कम करने के लिए कई सुझावों मसौदा तैयार कर रहा है। जिसमें कोचिंग इंस्टीट्यूट्स को नियमित करने के लिए भी कई सुझाव दिए जाने हैं।

'न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीपीसीआर की 6 सदस्यीय टीम ने बड़ी संख्या में छात्रों से बातचीत की। इसके अलावा कोचिंग इंस्टीट्यूट्स के अधिकारियों, पुलिस और जिला प्रशासन से भी इस संबंध में बैठक की। कमिशन कोचिंग इंस्टीट्यूट्स पर नियंत्रण करने के लिए दिशानिर्देश तैयार कर रहा है। जो मंत्रालय की तरफ से राज्य सरकार को भेजे जाएंगे। 

बताया जा रहा है, दिशानिर्देशों के मसौदे में कोचिंग सेंटर्स में अनिवार्य मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, सभी छात्रों के रहने के स्थान का रजिस्ट्रेशन और बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट्स को सभी छात्रों को रहने की सुविधा प्रदान करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा इसमें फीस के ढ़ांचे को भी नियमित करने की जरूरत बताई गई है। सरकार भी कई मंत्रालयों को मिलाकर एक समिति गठित कर रहा है। जो देश में सभी कोचिंग इंस्टीट्यूट्स को फुल-टाइम नियमित करेंगी।

गौरतलब है, कोटा में पिछले साल करीब 20 बच्चों ने खुदकुशी की। शहर में करीब 200 कोचिंग सेंटर्स हैं। यह इंडस्ट्री करीब 2,000 करोड़ की बताई जाती है। देश के हर हिस्से से छात्र-छात्राएं आईआईटी-जेईई की तैयारी के लिए हर साल बड़ी संख्या में आते हैं। जिसमें 12 लाख उम्मीदवारों में केवल 10,000 सीटें ही हैं। घर से अलग रहकर इसमें 16-18 घंटे की लगातार पढ़ाई के अलावा कई वजह हैं, जो उनके तनाव बढ़ाने का काम करते हैं।