वापस भारत नहीं आएगा कोहिनूर हीरा, सरकार ने बताया यह कारण

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली (18 अप्रैल): कोहिनूर हीरा जिसके बारे में ना जाने कितनी कहानियां आज तक दुनिया में तैरती हैं। जिसकी चमक आज भले ब्रिटेन की महारानी के ताज में नजर आती हो, लेकिन ये कोहिनूर कभी सोने की चिड़िया कहे जाने वाला भारत का मान था। उसी कोहिनूर हीरे को वापस भारत लाने की लड़ाई में अब नया मोड़ आया है। कोहिनूर हीरा देश में वापस लाए जाने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि कोहिनूर को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

तब सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि सीधे तौर पर कोहिनूर पर दावा नहीं किया जा सकता क्योंकि कोहिनूर को लूट कर नहीं ले जाया गया। 1849 सिख युद्ध में हर्जाने के तौर पर दिलीप सिंह ने कोहिनूर को अंग्रेजों के हवाले किया था। अगर उसे वापस मांगेंगे तो दूसरे मुल्कों की जो चीज़ें भारत के संग्रहालयों में हैं उन पर भी विदेशों से दावा किया जा सकता है।

कोहिनूर हीरे को ब्रिटेन से भारत वापस लाने के लिए जब सरकार की तरफ से हाथ खड़े होते दिखे तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस याचिका को पेंडिंग रखा जाएगा, क्योंकि अगर यह खारिज होती है तो केस कमजोर हो जाएगा और कहा जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट ने केस खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जैसे टीपू सुल्तान की तलवार वापस आई, हो सकता है आगे भी ऐसा ही हो।

आपको बता दें कि आंध्र प्रदेश की एक खान से निकला कोहिनूर हीरा पूरे 720 कैरेट का हुआ करता था। अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति मालिक काफ़ूर ने इसे जीता था और ये वर्षों तक खिलजी वंश के ख़ज़ाने में रहा। मुग़ल शासक बाबर के पास पहुंचने के बाद इसने मुग़लों के साथ सौ वर्ष बिताए। शाहजहां के मयूर सिंहासन पर अपनी चमक फैलाने के बाद कोहिनूर हीरा महाराज रंजीत सिंह तक के पास पहुंचा। आख़िरकार एक तोहफ़े के तौर पर कोहिनूर ब्रिटेन की महारानी को सौंपा गया और तब से ये महारानी के ताज में जड़ा हुआ है। एक ज़माने में दुनिया के सबसे बड़े हीरों में शुमार कोहिनूर अब सिर्फ 105 कैरेट का ही रह गया है।

पिछले दिनों पाकिस्तान ने भी कोहिनूर हीरे पर अपना हक जताया और इससे जुड़ी एक याचिका लाहौर की अदालत में मंजूर की। बांग्लादेश भी कोहिनूर पर हक जताता रहा है। जबकि 2013 में भारत आए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने साफ कहा था कि अगर हमने कोहिनूर वापस करने की बात मान ली तो धीरे-धीरे पूरा का पूरा ब्रिटिश संग्रहालय खाली हो जाएगा।