कोहिनूर हीरे ने बर्बाद कर दिए इतने वंश

नई दिल्ली (20 अप्रैल): कोहिनूर हीरे की चमक के आगे हर चमक फीकी है। दुनिया के सबसे चमकदार हीरे के दीदार के लिए अरबों आंखें तरसती रहती हैं। कभी ये हीरा हिंदुस्तान की शान हुआ करता था, जो अब ब्रिटेन की महारानी के ताज में जड़ा है। लेकिन एक कड़वा सच ये भी है कि कोहिनूर जहां-जहां गया, वहां सल्तनत उजड़ गई। आखिर कोहिनूर में ऐसा क्या है कि ये जहां जाता है-वहां तूफान ला देता है।

कहा जाता है कुछ चीजें अभिशप्त होती है, जिसके पास जाती हैं उसका सर्वनाश कर देती हैं। गोलकुंडा की खदान से निकला कोहिनूर भी एक ऐसा ही अभिशप्त दुनिया का सबसे चमकदार पत्थर है। जिसके पास भी ये हीरा गया वो बर्बाद हो गया। उसका राजपाट सब तहस नहस हो गया। कोहिनूर के बारे में कहा जाता है कि इसने एक के बाद एक दुनिया के कई साम्राज्यों को खत्म कर दिया। हिंदुस्तान का काकतीय राजवंश, मुगल सल्तनत, पंजाब के राजा रंजीत सिंह और ब्रिटिश हुकूमत। इस बेशकीमती हीरे ने सभी को दुनिया पर राज करने का सपना तो दिखाया लेकिन उनका अंजाम उनके अंत के साथ हुआ।

काकतीय वंश का अंत:

गोलकुंडा की खान से निकाले जाने के बाद 14वीं शताब्दी की शुरुआत में ये हीरा काकतीय वंश के पास आया। कोहिनूर आने के साथ ही इस राजवंश के बुरे दिन शुरू हो गए। कोहिनूर आने के 17 साल बाद ही काकतीय वंश हमेशा के लिए हिंदुस्तान के नक्शे से मिट गया।

तुगलक वंश का अंत:

काकतीय वंश को मैदान-ए-जंग में हराने वाले तुगलक शाह ने भी कोहिनूर के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था। इस चमकदार पत्थर को पाने की ख्वाहिश तुगलक शाह के मन में भी थी। ये चमकदार हीरा 1325 से 1351 तक मोहम्मद बिन तुगलक के पास रहा, उसके बाद से तुर्कों के हाथों में इधर-उधर आता-जाता रहा। जिसके पास भी कोहिनूर रहा, वो कभी चैन की नींद नहीं सो पाया। हमेशा उसके राज्य पर खतरे के बादल मंडराते रहे। कई हाथों से गुजरते हुए और कई राजवंशों को उजाड़ते हुए दुनिया का सबसे चमकदार पत्थर मुगलों के पास पहुंचा। कोहिनूर के बारे में ठोस जानकारी 1526 से मिलती है।

हुमायूं को भारत छोड़ना पड़ा:

मुगल बादशाह बाबर ने अपनी आत्मकथा में जिक्र किया है। लेकिन कड़वा सच ये भी है कि बाबर भी पूरी जिंदगी कभी चैन से नहीं जी सका। उसकी मौत के बाद कोहिनूर उसके पुत्र हुमायूं के हाथों में आया, लेकिन हुमायूं भी जीते-जी कभी चैन की सांस नहीं ले पाया। ये पत्थर जिसकी जिंदगी में गया, उसका दुनिया में नाम तो बहुत हुआ। लेकिन उसकी पूरी जिंदगी संघर्ष में बीत गयी। हुमायूं को शेरशाह सूरी के हाथों पराजित होकर हिंदुस्तान से भागना पड़ा। इसी तरह शेरशाह सूरी भी चैन से सांस नहीं ले पाया और एक हादसे में उसकी जान चली गयी। देखते ही देखते शेरशाह सूरी का वंश भी धीरे-धीरे तबाह हो गया। कहा जाता है कि जब अकबर सिंहासन पर बैठा तो उसे इस हीरे के अपशकुन योग का अंदाजा था। शायद इसीलिए उसने कभी कोहिनूर को अपने पास नहीं रखा। अकबर ने लंबा राज किया और उसके दौर में मुगल साम्राज्य हिंदुस्तान में अच्छी तरह जम गया।

क्या कोई चमकदार पत्थर किसी राजवंश को तबाह कर सकता है? सल्तनत उजाड़ सकता है? शायद, ये बहस अकबर के दौर में भी चली होगी और कोहिनूर को लेकर उसके बाद के दौर में भी। अकबर का पोता शाहजहां कोहिनूर का दीवाना था। उसकी आंखें इस पत्थर की चमक के दीदार के लिए बेचैन थी। उसने इस हीरे को अपने सिंहासन में जड़वा दिया और यही से शाहजहां के बुरे दिनों की शुरूआत हुई।

मुगलों का राज खत्‍म:

मुगल बादशाह शाहजहां कोहिनूर की चमक का दीवाना था। उसने इस बेशकीमती पत्थर को अपने मयूर सिंहासन में जड़वा दिया और यही से उसकी बुरे दिनों की शुरूआत हो गयी। कुछ दिनों बाद ही उसके बेटे औरंगजेब ने ही उसे आगरा के किले में कैद कर लिया। औरंगजेब की मौत के बाद मुगल कमजोर हो गए, लेकिन मयूर सिंहासन में जड़े बेशकीमती पत्थर की चर्चा पर्शिया के लुटेरे नादिर शाह तक पहुंच गयी। उसने दिल्ली पर हमला कर दिया। मुगल इतने कमजोर हो चुके थे कि उनके शासन मुहम्मद शाह ने नादिर शाह के सामने घुटने टेक दिए, सारी दौलत नादिर शाह को सौंप दी। कोहिनूर नादिर शाह के पास चला गया।

कोहिनूर के चक्‍कर में नादिरशाह पर्शिया की हुई हत्‍या:

कोहिनूर लेकर नादिरशाह पर्शिया चला गया, लेकिन 8 साल के भीतर ही उसकी हत्या कर दी गई। उसके वंशज कोहिनूर को लेकल अफगानिस्तान भाग गए।

अफगानिस्तान के शाह का तख्‍ता पलट:

उसके बाद ये बेशकीमती पत्थर अफगानिस्तान के शहंशाह अहमद शाह दुर्रानी के पास चला गया, जिसके बाद कोहिनूर दुर्रानी के वारिस शाह शुजा के पास गया। लेकिन कुछ दिनों में ही शाह शुजा का भी तख्ता पलट हो गया। किसी तरह शाह शुजा कोहिनूर के साथ भाग कर पंजाब पहुंचा और उसने कोहिनूर हीरा पंजाब के राजा रणजीत सिंह को सौंप दिया।

राजा रणजीत सिंह की मौत:

रणजीत सिंह को हीरा मिलने के कुछ साल बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गयी। इसी दौरान ब्रिटिश हुकूमत पैर तेजी से हिंदुस्तान में जम रहे थे। पंजाब भी ब्रिटिश हुकूमत के कब्जे में आ गया। तब 6 साल के दिलीप सिंह को पंजाब का राजा घोषित कर दिया गया। उसके बाद ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी की मौजूदगी में दिलीप सिंह ने कोहिनूर को तोहफे के तौर पर रानी विक्टोरिया को सौंप दिया।

ब्रिटिश हुकूमत क‍ा अंत:

पिछले करीब पौने दो सौ सालों से इस हीरे पर ब्रिटिश हुकूमत का मालिकाना हक है। कहा जाता है कि कि ब्रिटेन की महारानी ने हीरे के श्राप को बेसर करने का तरीका तलाश लिया। शापित हीरे की कहानियों से खौफ में आकर महारानी ने वसीयत की है कि इस हीरे को सिर्फ महिलाएं ही पहनेंगी। अगर कोई पुरूष राजा बनता है तो उसकी पत्नी ही कोहीनूर जड़ा ताज पहनेगी। लेकिन, बड़ा सच ये भी है कि जब से कोहिनूर ब्रिटेन पहुंचा है। ब्रिटिश साम्राज्य की ताकत कम होने लगी। जिस ब्रिटेन का कभी सूरज नहीं डूबता था, उसके उपनिवेश धीरे-धीरे आजाद होने लगे। यहां तक की दूसरे विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन दुनिया का सुपर पावर नहीं रहा, उसकी जगह अमेरिका ने ले ली।