जानें इससे पहले कब-कब और क्यों-क्यों रद्द हुआ सार्क सम्मेलन

संजीव त्रिवेदी, नई दिल्ली (28 सितंबर): आज की तारीख में पाकिस्तान से दुनिया के ज्यादातर देश परेशान हैं। हिंदुस्तान परेशान, अफगानिस्तान परेशान और बांग्लादेश परेशान है। अब दक्षिण एशियाई देशों के सबसे बड़े संगठन सार्क में भी पाकिस्तान कांटे की तरह चुभ रहा है, लेकिन सार्क के 31 साल के इतिहास में कई ऐसे मौके आए हैं जब समिट रद्द करना पड़ा।

पाकिस्तान जैसे देशों के अडियल रवैये की वजह से सार्क जैसा बड़ा संगठन भी 31 साल में कुछ खास कमाल नहीं कर पाया। आतंक का कारोबार करने वाला पाकिस्तान सार्क में हिंदुस्तान समेत सबको कांटे की तरह चुभ रहा है। सार्क के मंच पर हिंदुस्तान की हर अच्छी पहल का पाकिस्तान ने कड़ा विरोध किया है। सार्क देशों को आपस में जोड़ने की योजना में भी पाकिस्तान ने अडंगा लगाया।

सार्क में संकट नंबर-1 - सार्क के बनने के 4 साल बाद यानी 1989 में पहला बवाल शुरू हुआ। - श्रीलंका में होने वाले 5वें सार्क सम्मेलन को स्थगित किया गया। - श्रीलंका में इंडियन पीस कीपिंग फोर्स भेजने की वजह से बवाल।

सार्क में संकट नंबर-2 - 1992 में दूसरी बार और फिर जनवरी 1994 में तीसरी बार सार्क सम्मेलन स्थगित किया गया। - अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद पाकिस्तान-बांग्लादेश में काफी विरोध हुआ। - 1993 में किसी तरह बांग्लादेश में सम्मेलन हुआ। - लेकिन, 1994 में फिर स्थगित करना पड़ा। - प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव की पहल के बाद 1995 में दिल्ली में 8वां सम्मेलन आयोजित हुआ।

सार्क में संकट नंबर-3 - 1999 में सार्क के आयोजन को लेकर बवाल शुरू हो गया। - करगिल युद्ध, पाकिस्तान में तख्तापलट और भारतीय संसद पर हमले के बाद तीन साल तक सार्क सम्मेलन स्थगित रहा। - उसके बाद हालात सामान्य हुए और 2002 में नेपाल की खुबसूरत बादियों में 11 वां शिखर सम्मेलन हुआ। लेकिन, सार्क को इसके सदस्य देश अपने हिसाब से इस्तेमाल कर रहे थे।

सार्क में संकट नंबर-4 - 2005 में सूनामी और काठमांडू में राजशाही के खिलाफ विद्रोह ने एक बार फिर सम्मेलन पर असर डाला। - पहली बार जनवरी 2005 में यह बैठक सूनामी की वजह से रद्द हुई। - दूसरी बार भारत के पीएम ने फरवरी में इस बैठक में भाग लेने से इनकार कर दिया।

सार्क में संकट नंबर-5 - 2013 में फिर सार्क पर संकट के बादल घिरने लगे। नेपाल में हालात तेजी से बदल रहे थे। - नेपाल की आंतरिक स्थिति की वजह से 2014 तक सार्क सम्मेलन स्थगित रहा।

मतलब, आज सार्क जिस मोड पर खड़ा है। ऐसे हालात दक्षिण एशियाई देशों के इस संगठन में पहले भी आ चुके हैं और सार्क अपने सदस्य देशों की तनातनी के बीच से निकलते हुए नई राह पकड़ी है। लेकिन सार्क के गठन के समय एशिया के देशों को आपस में आज के यूरोपियन यूनियन की तरह जोड़ने का जो सपना देखा गया था, वो पाकिस्तान की अडंगेबाजी की वजह से पूरा नहीं हो पाया है।