जानें रानी पद्मावती का इतिहास, जिसपर अब छिड़ा है युद्ध...

नई दिल्ली (28 जनवरी): बॉलीवुड निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर हुए विवाद ने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजूपत करणी सेना का कहना है कि वह इतिहास से छेड़छाड़ नहीं होने देगी, जबकि इतिहासकारों का इस बारे में अगल-अलग मत है। कई इतिहासकारों का कहना है कि रानी पद्मावती थी ही नहीं और वह सिर्फ एक काल्पनिक कहानी मात्र है।

हालांकि कुछ रानी पद्मिनी के किरदार को सही बताते हैं। पद्मावती इतिहास की एक महान रानी के रूप में जानी जाती हैं। रानी पद्मिनी का उल्लेख सन 1540 ईसापूर्व में ‘मलिक मोहम्मद ज्यासी द्वारा लिखे गए महाकाव्य में पाया गया है।

मलिक मोहम्मद ज्यासी के महाकाव्य ‘पद्मावत’ के कुछ पंक्ति जिसमें रानी पद्मिनी के विषय में उन्होंने बताया था...

तन चितउर, मन राजा कीन्हा । हिय सिंघल, बुधि पदमिनि चीन्हा ॥

गुरू सुआ जेइ पंथ देखावा । बिनु गुरु जगत को निरगुन पावा ?॥

नागमती यह दुनिया-धंधा । बाँचा सोइ न एहि चित बंधा ॥

राघव दूत सोई सैतानू । माया अलाउदीन सुलतानू ॥

प्रेम-कथा एहि भाँति बिचारहु । बूझि लेहु जौ बूझै पारहु ॥

इस कविता के अनुसार रानी पद्मावती चित्तोड़ के राजा राणा रतन सिंह की पत्नी थी और समकालीन सिंहली (श्रीलंका का एक द्वीप) राजा की बेटी थी। रानी पद्मिनी को उनके अपार दिव्य सौन्दर्य के लिए जाना जाता था और आज भी उनके सुन्दर्य के विषय में इतिहास में उल्लेख है।

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