INSIDE STORY: बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेगा पाकिस्तान, जानिए एक समझौता रद्द होते ही क्यों रेगिस्तान में बदल जाएगा PAK...

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (23 सितंबर) :  उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान की जिस तरह से बौखलाहट सामने आ रही है उससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। जिसका असर राजनयिक और व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान के साथ 56 साल पुरानी सिंधु जल समझौते को खत्म किया जा सकता है। सरकार ने कहा है कि अगर पाकिस्तान के रवैये में कोई बदलाव नहीं आता है तो वह किसी भी हद तक जा सकती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने गुरुवार शाम सिंधु जल समझौते पर पूछे गए सवाल पर कहा, किसी भी समझौते के लिए आपसी भरोसा और सहयोग जरूरी होता है। जब उनसे बयान को स्पष्ट करने को कहा गया तो उन्होंने कहा कि कूटनीति में कई बातें पूरी तरह से साफ-साफ नहीं कही जाती हैं। फिलहाल वर्तमान में पाकिस्तान के साथ जो स्थिति है उसमें भरोसा और सहयोग दोनों ही दूर-दूर तक नहीं दिखते। अगर भारत सिंधु जल समझौता तोड़ देता है तो पाकिस्तान पानी के लिए तरस जाएगा। पाकिस्तान का पश्चिमी प्रांत रेगिस्तान बन जाएगा। यही कारण है कि भारत से पाकिस्तान की जंग कश्मीर और कश्मीरियों के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ पानी के लिए है। आइए जानते हैं आखिर क्या है सिंधु जल समझौता...

- सिंधु जल समझौता 19 सितंबर 1960 में छह नदियों के पानी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था। - समझौता पर भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाक राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। - समझौते के तहत छह नदियों- सिंधु, चेनाब, झेलम ब्यास, रावी और सतलुज का पानी पाकिस्तान को मिलता है। - सिंधु नदी संधि विश्व के इतिहास का सबसे उदार जल बंटवारा माना जाता है। - अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति ने 2011 में इस संधि को दुनिया की सफलतम संधि करार दिया था।  - इसके तहत पाकिस्तान को 80.52 फीसदी पानी यानी 167.2 अरब घन मीटर पानी सालाना दिया जाता है - दरअसल सिंधु समझौते के तहत उत्तर और दक्षिण को बांटने वाली एक रेखा तय की गई है। - सिंधु, चेनाब और झेलम उत्तर की नदियां मानी गई और ब्यास, रावी और सतलुज दक्षिण की।

पाकिस्तान को क्या फायदा मिल रहा है... - इन छह नदियों के पानी से पाकिस्तान में कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं।  - इन्हीं नदियों की वजह से पाकिस्तान का उत्तरी और पश्चिमी भाग हरा-भरा है।  - इन्हीं नदियों ने पाकिस्तान के 65 फीसदी भू-भाग इस्लामाबाद से कराची तक को उपजाऊ बना रखा है।  - इन्हीं नदियों बेसिन में पाकिस्तान का 70 फीसदी अनाज उगता है।  - 2.6 करोड़ एकड़ कृषि भूमि सिंचाई के लिए इन नदियों के जल पर निर्भर है।  - इन्हीं नदियों बेसिन में पाकिस्तान की 36 फीसदी बिजली का उत्पादन होता है। - यूनेसको के सर्वे के अनुसार 20 करोड़ की आबादी में से 15 करोड़ लोग सिंधु नदी बेसिन में रहते हैं। - यहीं नहीं पाकिस्तान के दोनों बड़े न्यूक्लियर प्लांट चश्मा और खुशाब भी इन्हीं नदियों के किनारे पर लगे हैं। - चश्मा के चारों न्यूक्लियर प्लांट पंजाब के मिंयावली में सिंधु नदी के किनारे लगे हैं। - ऐसे ही खुशाब के चारों न्यूक्लियर प्लांट पंजाब के सरगोधा में चेनाब नदी के किनारे लगे हैं।

पाकिस्तान पर क्या होगा असर... - अगर यह समझौता भारत रद्द कर देता है तो पाकिस्तान का 65 फीसदी भू-भाग बंजर हो जाएगा। - पाकिस्तान की दो तिहाई आबादी पानी के लिए त्राहिमाम-त्राहिमान करने लगेगी। - सिंधु और उसकी सहायक पांच नदियां पाकिस्तान के एक बड़े हिस्से की प्यास बुझाती हैं।  - पाकिस्तानी अखबार ट्रिब्यून ने भी माना है कि सिंधु के पानी के बगैर देश का एक हिस्सा रेगिस्तान बन जाएगा। - सिंधु, झेलम और चेनाब के पानी से पाकिस्तान में 36 फीसदी बिजली बनाई जाती है।  - अगर यह समझौता रद्द हो गया तो पाकिस्तान में बिजली को लेकर हाहाकार मच जाएगा। - इसके अलावा इन तीनों नदियों से सिंचाई भी की जाती है, 70 फीसदी अनाज उगता है।  - अगर यह समझौता रद्द हो गया तो पाकिस्तान में आकाल के हालात पैदा हो जाएंगे। - यही नहीं पाकिस्तान के दोनों बड़े न्यूक्लियर प्लांट चश्मा और खुशाब ठप पड़ जाएंगे। - कर्ज में गले तक डूबे पाकिस्तान के लिए यग झटका सहन करना आसान नहीं है।

कई बार इंटरनेशनल कोर्ट के चक्कर लगा चुका है पाकिस्तान...  - चेनाब नदी पर बगलिहार और स्वलाकोते जलविद्युत परियोजनायें बन रही हैं।  - वहीं झेलम की सहायक नदियों पर दुलहस्ती और किशनगंगा परियोजनायें चल रही हैं। - किशनगंगा प्रोजेक्ट को लेकर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत हेग जा चुका है। - 17 मई 2010 को भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत का रुख किया था। - जिस पर 2013 को भारत के पक्ष में फैसला देते हुए पाकिस्तान की आपत्तियों को खारिज कर दिया। - किशनगंगा प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है और सिर्फ कमीशन किया जाना बाकि है। - किशनगंगा के अलावा भारत बगलिहार वूलर बैराज व तुलबुल परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है।

भारत क्यों कर सकता है समझौता रद्द-  इस संधि को तोड़ने की मांग भारत में कई बार उठ चुकी है। 2005 में इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट और टाटा वाटर पॉलिसी प्रोग्राम ने भी इसे खत्म करने की मांग की थी। इनकी रिपोर्ट के मुताबिक संधि के चलते जम्मू-कश्मीर को हर साल 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। अकूत जल संसाधन होने के बावजूद इस संधि के चलते घाटी को बिजली नहीं मिल पा रही है।

- पूर्व वित्त और रक्षा मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने न्यूज 24 से किया खुलासा। - यशवंत सिन्हा के मुताबिक भारत को पाकिस्तान से सिंधु जल समझौता रद्द कर देना चाहिए। - क्योंकि किसी भी तरह के समझौते दोस्तों के बीच होते हैं ना कि दुश्मनों के बीच। - यशवंत सिन्हा ने समझौता रद्द करने के लिएपांच मुख्य वजहें भी बताई है। - पहली- 1972 शिमला समझौता, जिसे पाकिस्तान ने किया लेकिन आजतक पालन नहीं कर रहा। - दूसरा- 1999 लाहौर समझौता, दोस्ती के बड़े हाथ की जगह करगिल में घुसपैठ कर पीठ में मारा चाकू। - तीसरा- 2003 सीजफायर समझौते का उल्लंघनः पाक सेना लगातार सीमा पर फायरिंग करती रहती है। - चौथा- 2004 इस्लामाबाद समझौते का उल्लंघनः पाकिस्तान ने माना था कि उसकी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी करते हैं। - पांचवां- 2015 ऊफा समझौते का उल्लंघनः द्पक्षीय वार्ता में कश्मीर मुद्दा नहीं उठेगा, लेकिन पाकिस्तान ने नहीं माना।

Expert Comment: किसी भी समझौते के लिए आपसी भरोसा और सहयोग जरूरी होता है। लेकिन हमेशा पाकिस्तान ने भारत के भरोसे को तोड़ा और असहयोग जताया। यही नहीं किसी भी समझौते के बाद अगर समझौता करने वाले देशों के बीच युद्ध होता है तो उनके बीच का समझौता युद्ध की वजह से अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के तरह खत्म मान लिया जाता है। पाकिस्तान 1960 के बाद भारत से चार युद्ध में मुंह की खा चुका है। ऐसे में सिंधु जल समझौते के अस्तित्व का कोई मतलब ही नहीं रह जाता।